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एप्स्टीन फाइल्स; इंसानियत की शर्मिंदगी का कारण: मौलाना तक़ी अब्बास रिज़वी कलकत्वी

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एप्स्टीन फाइल्स; इंसानियत की शर्मिंदगी का कारण: मौलाना तक़ी अब्बास रिज़वी कलकत्वी

अहले बैत फाउंडेशन हिंदुस्तान के उपाध्यक्ष हुज्जतुल इस्लाम मौलाना तक़ी अब्बास रिज़वी कलकत्वी ने इन दिनों पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी एप्स्टीन फाइल्स के बारे में कहा कि एप्स्टीन फाइल्स इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली हैं। ये सिर्फ फाइलें नहीं, बल्कि मानवता के सीने पर लगे ऐसे घाव हैं जो हर पन्ना पलटने के साथ और गहरे होते जा रहे हैं।

 अहले बैत फाउंडेशन हिंदुस्तान के उपाध्यक्ष हुज्जतुल इस्लाम मौलाना तक़ी अब्बास रिज़वी कलकत्वी ने कहा कि एप्स्टीन फाइल्स इंसानियत को शर्मसार करने वाली हैं। ये केवल दस्तावेज़ नहीं, बल्कि मानवता के सीने पर लगे ऐसे ज़ख्म हैं जो हर नए खुलासे के साथ और गहरे होते जाते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि इन फाइलों ने उन परदों को चाक कर दिया जिनके पीछे पूरब और पश्चिम के अमीर व प्रभावशाली लोग अपनी ताकत और दौलत के घमंड में चूर थे। इन दस्तावेज़ों में मासूमियत की चीखें हैं, बेबसी की सिसकियाँ हैं, और वे रोंगटे खड़े कर देने वाली सच्चाइयाँ हैं जिन्होंने नैतिकता और इंसानियत को रौंद डाला था।

हुज्जतुल इस्लाम मौलाना तक़ी अब्बास रिज़वी कलकत्वी ने कहा कि छह मिलियन से अधिक पन्नों पर आधारित यह रिकॉर्ड केवल कागज़ों का ढेर नहीं है, बल्कि एक ऐसे अंधेरे जाल का विवरण है जिसमें अमेरिकी निवेशक और दोषी ठहराया गया नाबालिग यौन अपराधी जेफ़री एप्स्टीन और उसके प्रभावशाली सामाजिक दायरे के कथित अपराधों की परतें खुलती जाती हैं। इनमें राजनेताओं, व्यापारिक हस्तियों और मशहूर चेहरों के नाम सामने आते रहे, और हर नया खुलासा जनता के विश्वास की एक और ईंट गिरा देता था।

अहले बैत फाउंडेशन के उपाध्यक्ष ने कहा कि यह कहानी केवल कुछ व्यक्तियों के अपराधों की नहीं, बल्कि एक ऐसे तंत्र का प्रतिबिंब है जहाँ सत्ता के गलियारों में ज़मीर की आवाज़ धीमी पड़ जाती है और न्याय की रफ्तार सुस्त हो जाती है। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान जब इन फाइलों को सार्वजनिक करने की बात हुई तो उम्मीद और सनसनी की एक नई लहर उठी, लेकिन बाद में बयान बदलते रहे और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ने सच्चाई को और धुंधला कर दिया। इस तरह यह मामला केवल एक आपराधिक केस नहीं रहा, बल्कि राजनीति, शक्ति और सत्य के बीच संघर्ष का प्रतीक बन गया।

हुज्जतुल इस्लाम मौलाना तक़ी अब्बास रिज़वी कलकत्वी ने कहा कि एप्स्टीन फाइल्स इंसानियत के माथे पर ऐसा काला धब्बा हैं जो कभी मिट नहीं सकता। इनमें पूरब और पश्चिम के प्रभावशाली अमीरों की वे भयावह सच्चाइयाँ उजागर होती हैं जिन्होंने सत्ता और दौलत के नशे में नैतिकता, शराफत और इंसानियत को रौंदकर निर्दयता की दास्तानें लिखीं। हर नए खुलासे के साथ यह एहसास गहरा होता गया कि जब ताकत बेलगाम हो जाती है तो इंसानियत कितनी सस्ती हो जाती है। इस प्रकार ये फाइलें केवल कानूनी दस्तावेज़ नहीं रहीं, बल्कि सामूहिक शर्म, टूटे हुए विश्वास और सवालों से भरे भविष्य की कहानी बन गईं।

उन्होंने कहा कि एप्स्टीन स्कैंडल ने यह सवाल पूरी शिद्दत से उठा दिया है कि इंसान की असली परिभाषा क्या है? क्या वह केवल इच्छाओं का समूह है या नैतिक ज़िम्मेदारी वाला एक गरिमामय अस्तित्व? पश्चिमी सभ्यता ने दुनिया को आज़ादी के नाम पर पशुत्व को बढ़ावा दिया है, जबकि इस्लाम मानव गरिमा का पक्षधर और आदर्श नमूना है। इस्लाम इंसान को एक संपूर्ण जीवन-व्यवस्था प्रदान करता है जो उसे नैतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक सिद्धांतों के दायरे में रहकर गरिमामय जीवन जीने की राह दिखाता है। यह धर्म याद दिलाता है कि असली महानता शक्ति या धन में नहीं, बल्कि चरित्र, तक़वा और दूसरों के अधिकारों की रक्षा में है।

अहले बैत फाउंडेशन के उपाध्यक्ष ने कहा कि इस्लाम मानव सम्मान को बुनियादी मूल्य मानता है। वह जान, माल और इज़्ज़त की हिफाज़त को पवित्र अमानत समझता है और हर व्यक्ति को यह जिम्मेदारी देता है कि वह अपने आचरण से दूसरों के लिए आसानी और भलाई का कारण बने। अच्छा चरित्र, नरमी, क्षमा, न्याय और सेवा—ये वे स्तंभ हैं जिन पर एक उत्तम समाज की स्थापना होती है। यह धर्म इंसान को केवल इबादत तक सीमित नहीं करता, बल्कि याद दिलाता है कि सबसे अच्छा इंसान वह है जो दूसरों के लिए सबसे अधिक लाभकारी हो। इस प्रकार इस्लाम “अशरफ़ुल मख़लूक़ात” के दर्जे को बनाए रखने के लिए उच्च चरित्र, दिल की पवित्रता और सामाजिक जिम्मेदारी को अनिवार्य ठहराता है।यही वह आधार है जिस पर दोनों रास्ते एक-दूसरे से टकराते हैं। एक ओर वे अंधेरी ताकतें हैं जो लालच, भ्रष्टाचार और गुलामी की व्यवस्था को कायम रखना चाहती हैं, और दूसरी ओर इस्लाम है जो इंसान को नैतिकता, चेतना और आध्यात्मिकता के माध्यम से उसकी असली पहचान दिलाने की शिक्षा देता है। यही अंतर असली टकराव की जड़ है। इसी कारण एप्स्टीन के द्वीप पर बैठे शैतान इस्लाम से भयभीत हैं। वे जानते हैं कि यदि मुस्लिम उम्मत अपनी वैचारिक स्वतंत्रता प्राप्त कर ले और इंसान अपनी वास्तविक पहचान को पहचान ले, तो शक्ति, धन और संसाधनों के बल पर थोपे गए औपनिवेशिक गुलामी, शोषणकारी अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक आक्रमण का अंत स्वतः शुरू हो जाएगा। इस्लाम की रोशनी इंसान के दिल और दिमाग को जागृत करती है, और यही वह शक्ति है जो अत्याचार, शोषण और पाखंड के अंधेरे जाल को चीर सकती है।

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