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इस्लामाबाद हादसे पर इंसानियत शर्मसार

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इस्लामाबाद हादसे पर इंसानियत शर्मसार

 इस्लामाबाद में जुमआ की नमाज़ के दौरान शिया मुसलमानों पर हुआ आत्मघाती हमला बेहद दुखद, दिल दहला देने वाला और निंदा के क़ाबिल हादसा है। इबादतगाह में अल्लाह की इबादत में लगे बेगुनाह नमाज़ियों को निशाना बनाना खुली आतंकवाद, इंसानियत से दुश्मनी और धार्मिक मूल्यों का गंभीर उल्लंघन है।

, दिल्ली में रहने वाले मौलाना रज़ी हैदर फंदेड़वी ने अपने बयान में कहा कि इस्लामाबाद में जुमआ की नमाज़ के दौरान शिया मुसलमानों पर हुआ आत्मघाती हमला बहुत ही अफ़सोसनाक और दिलख़राश घटना है। इबादतगाह में बेगुनाह लोगों पर हमला साफ़ तौर पर आतंकवाद और इंसानियत के ख़िलाफ़ अपराध है।

उन्होंने कहा कि एक भारतीय नागरिक होने के नाते वह इस हादसे पर गहरा दुख और अफ़सोस ज़ाहिर करते हैं और शहीदों के परिवारों के साथ दिली हमदर्दी और संवेदना प्रकट करते हैं। उन्होंने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की दुआ भी की। ऐसे निर्दयी क़दम न सिर्फ़ क़ीमती जानों का नुकसान हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र के अमन और सामाजिक सौहार्द के लिए भी ख़तरा हैं।

साथ ही उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं का बार-बार होना संबंधित अधिकारियों की ज़िम्मेदारी और कामकाज पर सवाल खड़े करता है। इबादतगाहों और धार्मिक सभाओं की सुरक्षा करना हर सरकार की बुनियादी ज़िम्मेदारी है। जब लोग इबादत के दौरान भी सुरक्षित न हों, तो यह बहुत गंभीर चिंता का विषय है और ठोस कार्रवाई ज़रूरी हो जाती है।

मौलाना रज़ी हैदर ने कहा कि धार्मिक स्थल हमेशा अमन, इबादत और आत्मिक सुकून की जगह होते हैं। उन पर हमला दरअसल पूरी इंसानियत पर हमला है। ज़रूरत इस बात की है कि सभी फिरक़ों के लोग, धार्मिक और सामाजिक नेता और सरकारी संस्थाएं मिलकर उग्रवाद और आतंकवाद के ख़िलाफ़ मज़बूत रुख़ अपनाएं और समाज में सहनशीलता, आपसी सम्मान और एकता को बढ़ावा दें।

हमें नफ़रत और हिंसा के इस अंधेरे के मुक़ाबले में इंसानियत, एकता और अमन के चिराग़ जलाए रखने होंगे। हर इंसान, बिना किसी भेदभाव के, इबादत और ज़िंदगी की हिफ़ाज़त का हक़ रखता है और इस हक़ की रक्षा पूरी दुनिया की साझा इंसानी ज़िम्मेदारी है।

अल्लाह शहीदों के दर्जे बुलंद करे, उनके परिजनों को सब्र और बड़ा सवाब अता फ़रमाए और दुनिया भर में अमन और सलामती क़ायम करे।
आमीन।

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