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इन्क़ेलाब ए इस्लामी ख़ित्ते की तारीख़ का अहम मोड़।मौलाना करार हाशमी

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इन्क़ेलाब ए इस्लामी ख़ित्ते की तारीख़ का अहम मोड़।मौलाना करार हाशमी

 हौज़ा ए इल्मिया क़ुम मुक़द्दसा के तालिब-ए-इल्म मौलाना सैयद करार हाशमी ने 1979 के इन्क़ेलाब-ए-इस्लामी की 47वीं सालगिरह के मौक़े पर ईरानी अवाम और क़ियादत को दिली मुबारकबाद पेश करते हुए इस मौक़े को क़ौमी अहमियत का एक गहरा लम्हा क़रार दिया।

हौज़ा ए इल्मिया क़ुम मुक़द्दसा के तालिब-ए-इल्म मौलाना सैयद करार हाशमी ने 1979 के इन्क़िलाब-ए-इस्लामी की 47वीं सालगिरह पर ईरानी अवाम और क़ियादत को दिली मुबारकबाद पेश की और इसे क़ौमी अहमियत का अहम और गहरा लम्हा बताया।

उन्होंने इन्क़िलाब-ए-इस्लामी को एक तारीखी वाक़ेआ क़रार देते हुए कहा कि इस इन्क़िलाब ने ख़ित्ते के नक़्शे को बदल कर रख दिया और इसमें अवामी अज़्म का इज़हार बुनियादी अहमियत रखता है।

इन्क़ेलाब ए इस्लामी ख़ित्ते की तारीख़ का अहम मोड़।मौलाना करार हाशमी

उन्होंने इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह को ख़िराज-ए-तहसीन पेश करते हुए अशरा-ए-फ़ज्र को ईरानी अवाम के लिए गहरी क़ौमी एकजहती और ग़ौर-ओ-फ़िक्र के अय्याम क़रार दिया।

उन्होंने तारीखी नुक़्ता-ए-नज़र से गुज़िश्ता दशकों में मग़रिबी एशिया की जियो-पॉलिटिक्स में ईरान के मुस्तक़िल और बा-असर किरदार की तरफ़ इशारा करते हुए ख़ित्ते के इस्तेहकाम और ख़ुदमुख़्तारी के लिए मुक़ालमे और बाहमी एहतराम की अहमियत पर ज़ोर दिया।

उन्होंने ख़ित्ते के तमाम ममालिक के लिए अमन, तामीरी मशग़ूलियत और मुश्तरका ख़ुशहाली से मुमताज़ मुस्तक़बिल की वसीअतर उम्मीद के तनाज़ुर में आलम-ए-इस्लाम में इज्तिमाई तहज़ीबी अहदाफ़ की तरक़्क़ी के लिए नेक ख़्वाहिशात का इज़हार किया।

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