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रमज़ान में मस्जिद-ए-अक़्सा में दाख़िले पर पाबंदियाँ;इज़राईली हुकूमत का सख़्त सिक्योरिटी प्लान

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रमज़ान में मस्जिद-ए-अक़्सा में दाख़िले पर पाबंदियाँ;इज़राईली हुकूमत का सख़्त सिक्योरिटी प्लान

 इज़राईली हुकूमत के सिक्योरिटी इदारों ने हुक्काम से कहा है कि माह-ए-मुबारक रमज़ान के दौरान फ़ौजी इक़दामात में इज़ाफ़ा किया जाए और मस्जिद-ए-अक़्सा में नमाज़ की अदायगी के लिए सख़्त पाबंदियाँ आइद की जाएँ।

इस्राइली चैनल 15 ने जुमेरात के रोज़ रिपोर्ट दी है कि वेस्ट बैंक में जारिहाना कार्रवाइयाँ रमज़ान के दौरान भी “एहतियात” के साथ जारी रखी जाएँगी। ज़राए के हवाले से बताया गया है कि जुमा के दिनों में वेस्ट बैंक से सिर्फ़ 10 हज़ार फ़िलस्तीनीयों को मस्जिद-ए-अक़्सा में दाख़िले की इजाज़त दी जाएगी जब कि उम्र के लिहाज़ से भी पाबंदियाँ नाफ़िज़ की जाएँगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, हालिया क़ैदियों के तबादले के मुआहिदों के तहत रिहा होने वाले फ़िलस्तीनीयों का मस्जिद-ए-अक़्सा में दाख़िला मुकम्मल तौर पर ममनूअ होगा।

इज़राइली सिक्योरिटी इदारों ने मग़रिबी किनारे में सख़्त पॉलिसी अपनाने की भी सिफ़ारिश की है। इस हिकमत-ए-अमली के तहत गुज़श्ता बरसों के बरअक्स रमज़ान में भी गिरफ़्तारियाँ और घरों की मस्मारी जैसी कार्रवाइयाँ मुअत्तल नहीं की जाएँगी।

ताहम इन्हीं इदारों ने ख़बरदार किया है कि अगर मग़रिबी किनारे के अवाम पर दबाव हद से बढ़ गया तो हालात के “बिगड़ने” का ख़तरा मौजूद है, जिसके नतीजे में सिक्योरिटी सूरत-ए-हाल मज़ीद कश़ीदा हो सकती है।

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