ख़ुरासान-ए-रिज़वी में वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि ने ईद-ए-ग़दीर और इमाम खुमैनी (र) की बरसी के एक साथ आने का उल्लेख करते हुए विलाई कार्यक्रमों को भव्य और सारगर्भित ढंग से आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा: ग़दीर के उत्सवों को जनशक्ति और सांस्कृतिक क्षमताओं का उपयोग करते हुए विलायत की शिक्षाओं को स्पष्ट करने और इस्लामी क्रांति के संस्थापक के विचारों को पुनः पढ़ने के अवसर में बदलना चाहिए।
मशहद, हौज़ा: ख़ुरासान-ए-रिज़वी में वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि आयतुल्लाह अलम उल हुदा ने 'जश्न-ए-बुज़ुर्ग-ए-मरदुमी-ए-ग़दीर' के समन्वय बैठक में कहा कि ईद-ए-ग़दीर केवल रस्मी अवसर नहीं, बल्कि इस्लामी इतिहास में इमामत और विलायत की निरंतरता की अभिव्यक्ति है। इस बड़ी ईद को गहन, प्रभावशाली और जन-केंद्रित दृष्टिकोण से मनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दहे विलायत के कार्यक्रम सामग्री, गुणवत्ता और विस्तार में पिछले वर्षों से बेहतर होने चाहिए। सार्वजनिक समारोहों में सामाजिक उल्लास के साथ-साथ युवाओं को ग़दीर के शैक्षिक संदेश स्पष्ट करना आवश्यक है।
आयतुल्लाह आलमुलहुदा ने ईद-ए-ग़दीर और इमाम खुमैनी (रह) की बरसी के संयोग पर कहा कि यह क्रांति के संस्थापक के विचारों को पुनः पढ़ने और क्रांति का विलायत से गहरे संबंध को समझाने का अनमोल अवसर है।
उन्होंने कहा कि ग़दीर उत्सवों को भव्य बनाने के लिए सभी तंत्रों, कार्यकारी एवं सांस्कृतिक संस्थानों को व्यापक सहयोग करना चाहिए। मौकिबों का विस्तार, इताम (खाना खिलाना) तथा प्रांत में सांस्कृतिक एवं सामाजिक सेवाओं को इस प्रकार विस्तारित किया जाए कि समाज के सभी वर्ग इस ईद के लाभों से लाभान्वित हो सकें।
जिहाद-ए-तबयीन में रूहानियत की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हौज़ा और धर्मगुरु ग़दीर की सच्चाई, विलायत का स्थान और इमाम खुमैनी के विचारों को समझाने के लिए पूरी क्षमता से सक्रिय हों। सभी अधिकारियों का अहले बैत (अ) की शिक्षाओं के प्रसार में गंभीर कर्तव्य है, इसमें लापरवाही उचित नहीं। बैठक के अंत में प्रतिनिधियों ने प्रांत में प्रस्तावित कार्यक्रमों की रिपोर्ट प्रस्तुत की।