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ग़दीर कुल ए दीन के बराबर है / तौहीद की प्राप्ति की शर्त विलायत है

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ग़दीर कुल ए दीन के बराबर है / तौहीद की प्राप्ति की शर्त विलायत है

अली अकबर रिशाद ने कहा कि ग़दीर को केवल एक ऐतिहासिक घटना तक सीमित नहीं करना चाहिए क्योंकि वाक़िआ ए ग़दीर एक सतत प्रवाहित होने वाला समुद्र है और मानव के ज्ञानात्मक तथा व्यावहारिक जीवन में तौहीद की वास्तविक स्थापना की शर्त है।

अली अकबर रिशाद ने रिज़वी शिक्षाओं में इमामत विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि ग़दीर एक "समुद्र" और "कुल-ए-दीन" है। उन्होंने मशहूर हदीस सिलसिलतुल-ज़हब का हवाला देते हुए कहा कि विलायत, बाहरी और सामाजिक जीवन में तौहीद के साकार होने की अनिवार्य शर्त है।

उन्होंने ग़दीर के उच्च स्थान की ओर संकेत करते हुए कहा कि दुर्भाग्य से कुछ लोग ग़दीर को केवल एक ऐतिहासिक घटना समझते हैं, जबकि इसकी एक अस्तित्वगत और आध्यात्मिक हैसियत है। यह कोई समाप्त हो जाने वाला प्रसंग नहीं, बल्कि एक निरंतर और सदैव प्रवाहित रहने वाली वास्तविकता है।

उन्होंने कहा कि इमामत और विलायत का विषय पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम की दावत के आरम्भ से लेकर जीवन के अंतिम क्षणों तक मौजूद रहा। इससे स्पष्ट होता है कि विलायत कोई साधारण या गौण शिक्षा नहीं है, बल्कि यह दीन की मूल संरचना और उसकी सम्पूर्णता का प्रतिनिधित्व करती है। दूसरे शब्दों में विलायत पूरे दीन के बराबर महत्व रखती है।

उन्होंने इमाम अली अल-रज़ा की प्रसिद्ध हदीस सिलसिलतुल-ज़हब का उल्लेख करते हुए कहा कि इमाम रज़ा (अ.स.) ने निशापुर में फ़रमाया:
لا الہ الا اللہ حصنی فمن دخل حصنی امن من عذابی
ला इलाहा इल्लल्लाह मेरा क़िला है, जो इसमें प्रवेश करेगा वह मेरे अज़ाब से सुरक्षित रहेगा।

फिर आपने उसकी शर्त भी बयान की:

"बिशुरूतिहा व अना मिन शुरूतिहा"
अर्थात: "लेकिन इसकी कुछ शर्तें हैं और मैं उन शर्तों में से एक हूँ।

रिशाद ने कहा कि इस हदीस के अनुसार विलायत के बिना तौहीद पूर्ण नहीं होती। यदि शर्त समाप्त हो जाए तो शर्त से जुड़ी हुई वस्तु भी शेष नहीं रहती।

उन्होंने आगे कहा कि हदीस ए सिलसिलतुल-ज़हब उन क़ुदसी अहादीस में से है जो ईश्वरीय शिक्षाओं का सार और निचोड़ प्रस्तुत करती हैं। जिस प्रकार ख़ुत्बा-ए-फ़दकिया को नहजुल बलाग़ा के मुख्य संदेशों का सार कहा जा सकता है और ज़ियारत-ए-जामेआ कबीरा अहलेबैत (अ.स.) के ज्ञान और शिक्षाओं का निचोड़ है, उसी प्रकार यह क़ुदसी हदीस भी पूरे दीन का संक्षिप्त लेकिन अत्यंत गहन सार प्रस्तुत करती है।

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