तुर्किये के शहर इस्तांबुल में ईद-ए-ग़दीर के ऐतिहासिक और धार्मिक पहलुओं पर एक इल्मी सेमिनार आयोजित किया गया जिसमें दीनी, शैक्षणिक, सांस्कृतिक और विश्वविद्यालयी हस्तियों ने भाग लिया।
इस्तांबुल में आयोजित इस सेमिनार में ग़दीर-ए-ख़ुम की ऐतिहासिक और धार्मिक अहमियत पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम का आयोजन बाजीलार म्युनिसिपल हॉल में हुआ जहाँ स्वागत भाषण के बाद विशिष्ट अतिथियों का परिचय कराया गया।
इस सेमिनार में वक्ताओं ने अपने संबोधनों में ग़दीर की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता को उजागर करते हुए कहा कि ग़दीर का संदेश और उसकी शिक्षाएँ मुस्लिम समाज में आपसी समझ, संवाद, भाईचारे तथा एकता को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती हैं।
सेमिनार के दौरान उन प्रामाणिक इस्लामी स्रोतों और विद्वतापूर्ण कृतियों का भी अध्ययन प्रस्तुत किया गया, जिनमें ख़ुत्बा-ए-ग़दीर और वाक़ेआ-ए-ग़दीर का उल्लेख मिलता है। इस अवसर पर विभिन्न हदीसी और ऐतिहासिक ग्रंथों में संरक्षित रिवायतों तथा ऐतिहासिक प्रमाणों पर विस्तृत चर्चा हुई।
प्रतिभागियों ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि वाक़ेआ-ए-ग़दीर इस्लामी इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। इसके गहन अध्ययन और सही समझ के माध्यम से उम्मत-ए-मुस्लिमा के बीच आपसी सम्मान, धार्मिक जागरूकता और एकता की भावना को और अधिक मज़बूत किया जा सकता है।