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देश के भीतर छोटा-सा मतभेद भी विरोधियों को मज़बूत कर सकता है।

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देश के भीतर छोटा-सा मतभेद भी विरोधियों को मज़बूत कर सकता है।

हज़रत मासूमा (स.अ.) के पवित्र हरम के खातीब हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद हुसैन मोमेनी ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में देश के भीतर होने वाला छोटा-सा मतभेद भी विरोधियों को लाभ पहुंचाता है और प्रतिरोध मोर्चे को कमजोर करता है। इसलिए ऐसे किसी भी विवाद या बातचीत से बचना चाहिए जो समाज में विभाजन पैदा करे।

हज़रत मासूमा (स.अ.) के पवित्र हरम के खातीब हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद हुसैन मोमेनी ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में देश के भीतर होने वाला छोटा-सा मतभेद भी विरोधियों को लाभ पहुंचाता है और प्रतिरोध मोर्चे को कमजोर करता है। इसलिए ऐसे किसी भी विवाद या बातचीत से बचना चाहिए जो समाज में विभाजन पैदा करे।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि क़ुरआन के अनुसार कठिनाइयों और परीक्षाओं को ईश्वरीय दृष्टि से देखना चाहिए तथा अल्लाह पर भरोसा बनाए रखना चाहिए।

मोमेनी ने हाल के शहीद नेता की शहादत को एक बड़ी परीक्षा बताते हुए कहा कि अल्लाह ने इसकी भरपाई तीन रूपों में की है पहला, देश को योग्य नेतृत्व मिलना; दूसरा, विरोधियों की लगातार विफलता; और तीसरा, समाज में एकता और आपसी निकटता का बढ़ना, जिसकी रक्षा करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि इस्लामी क्रांति का आधार इमाम हुसैन (अ.स.) के आंदोलन से जुड़ा है और यह उसी मार्ग की निरंतरता है। उनके अनुसार, त्याग, ईश्वर के मार्ग में समर्पण और नेतृत्व का अनुसरण इस आंदोलन की प्रमुख विशेषताएँ हैं।

मोमेनी ने एकता बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान समय में समाज में फूट डालने वाली बातों से बचना चाहिए और राष्ट्रीय एकजुटता को मजबूत करना चाहिए।

उन्होंने अंत में कहा कि क़ुरआन की शिक्षा के अनुसार लोगों को अपने वचनों और आदर्शों पर दृढ़ रहना चाहिए तथा शहीदों के आदर्शों और समाज की एकता की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।

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