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ईरान पर अमेरिकी हमलों पर संयुक्त राष्ट्र की चुप्पी हिंसा को बढ़ावा देने वाली है

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ईरान पर अमेरिकी हमलों पर संयुक्त राष्ट्र की चुप्पी हिंसा को बढ़ावा देने वाली है

सनंदज की इफ़्ता परिषद एवं उलेमा परिषद के सदस्य मामोस्ता मोहम्मद अमीन रास्ती ने कहा कि ईरान के विरुद्ध अमेरिका के लगातार हमलों के बावजूद संयुक्त राष्ट्र की चुप्पी चिंताजनक है। उनके अनुसार, ऐसा प्रतीत होता है कि यह मौन अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ़ जारी कार्रवाइयों को अप्रत्यक्ष रूप से प्रोत्साहन देने जैसा है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , सनंदज के इफ़्ता परिषद एवं उलेमा परिषद के सदस्य मामोस्ता मोहम्मद अमीन रास्ती ने कहा कि ईरान के दक्षिणी प्रांतों पर अमेरिकी हमलों के बावजूद संयुक्त राष्ट्र की चुप्पी चिंता का विषय है। उनके अनुसार, यह मौन ऐसे हमलों के जारी रहने के लिए एक प्रकार का "ग्रीन सिग्नल" प्रतीत होता है।

उन्होंने कहा कि जब युद्धविराम और समझौते की बातें हो रही थीं, तभी यह स्पष्ट था कि अमेरिका इस अवसर का उपयोग अपनी सैन्य तैयारी को मजबूत करने और दोबारा हमला करने के लिए करेगा।

मामोस्ता रास्ती ने आरोप लगाया कि अमेरिका अपने बयानों और समझौतों का पालन नहीं करता तथा उसकी नीतियाँ अन्य देशों के विरुद्ध सैन्य हस्तक्षेप पर आधारित हैं।

उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ खाड़ी देशों ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के विरुद्ध कार्रवाई में सहयोग किया है। उनके अनुसार, इन देशों ने अपनी भूमि अमेरिका को उपलब्ध कराकर गंभीर राजनीतिक भूल की है, जिसके परिणाम भविष्य में उन्हें भुगतने पड़ सकते हैं।

उन्होंने कहा कि हाल के हमलों में रिहायशी इलाकों और संपर्क मार्गों को निशाना बनाया गया, जिससे अनेक नागरिकों के हताहत होने का दावा किया गया। उन्होंने इस संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र की निष्क्रियता की आलोचना की।

मामोस्ता रास्ती ने आगे कहा कि ईरान की सशस्त्र सेनाएँ अपनी रक्षात्मक क्षमता के बल पर इन चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका अपने उद्देश्यों में सफल नहीं होगा और अंततः उसे असफलता का सामना करना पड़ेगा।

अंत में उन्होंने कहा कि क्षेत्र के जिन देशों ने इस संघर्ष में अमेरिका का साथ दिया है, उन्हें भविष्य में इसके राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

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