मशहूर बहरैनी शिया धर्मगुरु शेख आदिल अल-शअला ने कहा कि आज बहरैन में शिया नागरिकों के अधिकारों का लगातार हो रहा उल्लंघन केवल राजनीतिक या सुरक्षा प्रतिबंधों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह धार्मिक और मानवीय पवित्रताओं के प्रत्यक्ष अपमान का रूप ले चुका है।
मशहूर बहरैनी शिया धर्मगुरु शेख आदिल अल-शअला ने कहा कि आज बहरैन में शिया नागरिकों के अधिकारों का लगातार हो रहा उल्लंघन केवल राजनीतिक या सुरक्षा प्रतिबंधों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह धार्मिक और मानवीय पवित्रताओं के प्रत्यक्ष अपमान का रूप ले चुका है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ व्यवस्था अहलुलबैत (अ.स.) के अनुयायियों की धार्मिक पहचान, उनके धार्मिक स्थलों और संस्थाओं को निशाना बना रही है तथा देश की सबसे बड़ी आबादी वाले शिया समुदाय के विरुद्ध अभूतपूर्व कार्रवाई कर रही है।
शेख अल-शअला ने कहा कि बहरीन की सत्ता न्यायपालिका पर नियंत्रण स्थापित कर जाफ़री अदालतों के अधिकारों को सीमित कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिया वक्फ़ संपत्तियों पर अवैध कब्ज़ा किया जा रहा है और कई ऐतिहासिक मस्जिदों को ध्वस्त कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि शिया क्षेत्रों में नई मस्जिदों के निर्माण पर रोक लगाई जाती है, जबकि उन्हीं इलाकों में दूसरे समुदायों की मस्जिदों के निर्माण की अनुमति दी जाती है। उनके अनुसार, यह सांप्रदायिक भेदभाव की संगठित नीति का प्रमाण है।
शेख अल-शअला ने आरोप लगाया कि अनेक शिया उलेमा और प्रमुख धार्मिक विद्वानों को गिरफ़्तार किया गया है तथा उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया है। उन्होंने कहा कि हिरासत में बंद उलेमा के साथ कथित यातना और दुर्व्यवहार की खबरें मानवाधिकार उल्लंघनों की गंभीरता को दर्शाती हैं।
उन्होंने कहा कि यदि प्रतिष्ठित धार्मिक विद्वानों के साथ ऐसा व्यवहार हो रहा है, तो आम नागरिकों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। उनके अनुसार, लोगों के घरों पर छापे, परिवारों को डराना, धार्मिक अनुष्ठानों पर प्रतिबंध लगाना और कैदियों को निशाना बनाना मानव गरिमा के विरुद्ध है।
अपने वक्तव्य के अंत में शेख आदिल अल-शअला ने इन नीतियों को समाप्त करने, सभी नागरिकों की गरिमा का सम्मान करने तथा धार्मिक और मानवीय अधिकारों की रक्षा करने की अपील की हैं।