एक ब्रिटिश अखबार का मानना है कि ट्रंप की आत्ममुग्धता अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की पहली दुश्मन है और इसने उन्हें सामूहिक विनाश के हथियार से भी अधिक खतरनाक कारक बना दिया है।
ब्रिटिश अखबार 'द गार्डियन' के प्रमुख लेखक और विश्लेषक 'साइमन टिस्डेल' ने लिखा कि "सबसे बड़ा वैश्विक खतरा केवल दुश्मनों की शक्ति या संघर्षों की प्रकृति में निहित नहीं है बल्कि 'संकट के प्रबंधन के लिए एक स्पष्ट रणनीति की कमी' में निहित है।"
इस ब्रिटिश अखबार का मानना है कि "ट्रंप की आत्ममुग्धता वैश्विक पहली दुश्मन है और इसी आत्ममुग्धता ने वर्तमान युद्ध को अनियंत्रित रूप से बढ़ा दिया है।" उन्होंने कहा कि "ट्रंप एक मोबाइल सामूहिक विनाश का हथियार है।"
यह कहते हुए कि "ट्रंप ईरानी संकट में सबसे खतरनाक कारक बन गए हैं" उनका मानना है कि "इस संघर्ष में उनके प्रबंधन के तरीके ने संयुक्त राज्य अमेरिका और दुनिया को एक राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य गतिरोध में डाल दिया है जिससे निकलना मुश्किल है।"
'द गार्डियन' अखबार के लेखक ने ईरान के खिलाफ युद्ध को ट्रंप के जल्दबाजी भरे और रणनीतिक दृष्टिकोण से रहित निर्णयों का परिणाम बताते हुए चेतावनी दी कि "तनाव की निरंतरता वैश्विक परिणामों वाले एक व्यापक और लंबे युद्ध का कारण बन सकती है।"
टिस्डेल कहते हैं कि "वाशिंगटन की अपेक्षा के विपरीत ईरान के खिलाफ अमेरिकी हमले ईरानी व्यवस्था को कमजोर नहीं करते हैं बल्कि ईरान के अंदर शासन की स्थिति को मजबूत करते हैं और जनता की राय को संगठित करने और सुरक्षा नीतियों को उचित ठहराने में उनकी मदद करते हैं।"
इस अखबार ने ट्रंप और उनके युद्ध मंत्री 'पीट हेगसेथ' के ईरान युद्ध में जीत के बारे में बयानों की आलोचना करते हुए लिखा कि "एक 'बड़ी जीत' की बात करना वास्तविकता के अनुरूप नहीं है; क्योंकि अमेरिका अपने मुख्य लक्ष्यों को प्राप्त करने में विफल रहा है और साथ ही युद्ध की मानवीय, आर्थिक और राजनीतिक लागत बढ़ रही है।"
इस लेख ने ट्रंप के एक 'लंबे क्षीणकारी युद्ध' में फँसने का उल्लेख करते हुए ट्रंप के व्यक्तित्व और सोच को संकट की निरंतरता का मुख्य कारण बताया और कहा कि "ट्रंप के निर्णय दीर्घकालिक रणनीतिक गणनाओं के बजाय शक्ति का प्रदर्शन और क्षणिक राजनीतिक जीत हासिल करने से अधिक प्रभावित होते हैं।"