Print this page

शहीद इमाम' का मक्तब सिखाता है/ जिम्मेदारी, साहस और अटल संकल्प

Rate this item
(0 votes)
शहीद इमाम' का मक्तब सिखाता है/ जिम्मेदारी, साहस और अटल संकल्प

हुज्जतुल इस्लाम सैय्यद मोहम्मद पंजतनियान ने टीवी कार्यक्रम "बायद बरखास्त" में विलायत-ए-फ़क़ीह के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि "शहीद इमाम" का जीवन विलायत-आधारित समाज के लिए एक रणनीतिक आदर्श है। उन्होंने कहा कि ईश्वरीय नेतृत्व की सबसे बड़ी विशेषता ऐसे समाज का निर्माण करना है, जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी ईमान, जिम्मेदारी और दृढ़ता के साथ आगे बढ़े तथा अल्लाह की सहायता का मार्ग प्रशस्त करे।

मशहद, शम्सुश शुमूस (अ.स.) फ़िक़्ही मदरसे के प्रभारी हुज्जतुल इस्लाम सैय्यद मोहम्मद पंजतनियान ने टीवी कार्यक्रम "बायद बरखास्त" में विलायत-ए-फ़क़ीह के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि "शहीद इमाम" का जीवन विलायत-आधारित समाज के लिए एक रणनीतिक आदर्श है। उन्होंने कहा कि ईश्वरीय नेतृत्व की सबसे बड़ी विशेषता ऐसे समाज का निर्माण करना है, जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी ईमान, जिम्मेदारी और दृढ़ता के साथ आगे बढ़े तथा अल्लाह की सहायता का मार्ग प्रशस्त करे।

उन्होंने कहा कि सूरह हदीद (25) के अनुसार, नबियों और आसमानी किताबों के भेजे जाने का उद्देश्य यह है कि लोग स्वयं न्याय की स्थापना के लिए खड़े हों और अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वाह करें।

समाज को जिम्मेदार बनाना ही नेतृत्व की कला:

उन्होंने कहा कि धार्मिक नेताओं का वास्तविक कार्य लोगों को आध्यात्मिक और नैतिक विकास की राह पर ले जाना है। आज तमाम प्रतिबंधों, धमकियों, षड्यंत्रों और आतंक के बावजूद ईरान की जनता का डटे रहना इसी विलायती प्रशिक्षण का परिणाम है, जिसने देश और इस्लामी क्रांति की रक्षा की है।

शहीद इमाम" का जीवन त्याग और सेवा का प्रतीक:

हुज्जतुल इस्लाम पंजतनियान ने कहा कि शहीद इमाम" ने जनता की उन्नति और समाज के विकास के लिए अपनी लेखनी, कर्म, वाणी, जीवन, यहाँ तक कि अपना रक्त और परिवार भी अल्लाह की राह में समर्पित कर दिया। यही एक सच्चे वली-ए-फ़क़ीह का आदर्श है।

क़ुरआन जिम्मेदारी निभाने की शिक्षा देता है:

उन्होंने कहा कि अल्लाह अपने विशेष बंदों को असाधारण शक्तियाँ देने के बावजूद चाहता है कि लोग स्वयं कठिनाइयों का सामना करें और अपनी जिम्मेदारियाँ निभाएँ। उन्होंने सूरह मायदा (24) का उल्लेख करते हुए कहा कि बनी इस्राईल की जिम्मेदारी से भागने वाली सोच की क़ुरआन ने निंदा की है।

कठिन परिस्थितियों में अल्लाह की सहायता पर विश्वास:

उन्होंने कहा कि शहीद इमाम हमेशा इस बात पर ज़ोर देते थे कि जैसे हज़रत मूसा (अ.स.) ने समुद्र के सामने कठिन परिस्थिति में पूरा भरोसा रखते हुए कहा था—"निश्चय ही मेरा पालनहार मेरे साथ है, वह मुझे मार्ग दिखाएगा उसी प्रकार आज भी यदि लोग ईमान और दृढ़ता के साथ डटे रहें, तो अल्लाह की सहायता अवश्य प्राप्त होगी।

Read 3 times