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ईरान और चीन के बीच शैक्षणिक सहयोग को मिलेगी नई दिशा

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ईरान और चीन के बीच शैक्षणिक सहयोग को मिलेगी नई दिशा

चीन के राजदूत और प्रो. अली अकबर रिशाद की मुलाकात का सबसे महत्वपूर्ण विषय ईरान-चीन संयुक्त शोध संस्थान की स्थापना की संभावना पर चर्चा था। इसका उद्देश्य दोनों देशों के विद्वानों के बीच मानविकी के क्षेत्र में संयुक्त शोध और शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देना है।

 चीन के राजदूत सोंग पेईवो ने इस्लामिक संस्कृति एवं चिंतन अनुसंधान संस्थान के संस्थापक एवं अध्यक्ष प्रो. अली अकबर रिशाद से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने ईरान और चीन के बीच संयुक्त शोध संस्थान स्थापित करने की संभावना पर चर्चा की, जिसका उद्देश्य मानविकी और सामाजिक विज्ञान के क्षेत्रों में साझा अनुसंधान को बढ़ावा देना है।

बैठक में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, विशेष रूप से अमेरिका द्वारा ईरान के विरुद्ध हालिया सैन्य कार्रवाई, उसके प्रभाव तथा इन घटनाओं के वैज्ञानिक और मीडिया स्तर पर विश्लेषण की आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया गया।

प्रो. रिशाद ने अपने संस्थान की शैक्षणिक, शोध एवं अंतरराष्ट्रीय क्षमताओं का परिचय देते हुए कहा कि ज्ञान के विकास और रणनीतिक विषयों पर बौद्धिक संवाद को आगे बढ़ाने में शोध संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

दोनों पक्षों ने ईरान और चीन के विश्वविद्यालयों तथा शोध संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने, संयुक्त शोध परियोजनाएँ चलाने, वैज्ञानिक अनुभवों के आदान-प्रदान और अनुसंधान क्षमताओं को साझा करने पर सहमति व्यक्त की।

बैठक का प्रमुख विषय ईरान-चीन संयुक्त शोध संस्थान की स्थापना था, जहाँ मानविकी, दर्शन, सांस्कृतिक अध्ययन और सभ्यता अध्ययन के क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा तथा दोनों देशों के विद्वानों के बीच वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत किया जाएगा।

इसके अलावा, संयुक्त वैज्ञानिक संगोष्ठियों के आयोजन, प्रोफेसरों और शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान तथा साझा शोध परियोजनाओं को व्यावहारिक रूप देने के लिए वार्ताओं को जारी रखने पर भी जोर दिया गया।

बैठक के अंत में दोनों पक्षों ने ईरान और चीन के बीच शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने तथा दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

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