सर्वोच्च नेता ने हिज़्बुल्लाह के महासचिव और मुजाहिदीन के पत्र के उत्तर में कहा कि इस्लामी गणराज्य ईरान, शहीद-ए-इंक़िलाब इमाम सैयद अली ख़ामेनई की नीति के अनुसार, हिज़्बुल्लाह के इन उत्पीड़ित और साहसी मुजाहिदीन का समर्थन अपनी रणनीतिक पॉलिसी मानता है।उन्होंने कहा कि लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा तथा इस्राइली सरकार की आक्रामकता का पूर्ण और बिना शर्त अंत, अमेरिका द्वारा थोपी गई इस युद्ध को समाप्त करने वाले किसी भी समझौते की पहली शर्त है।
सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सैयद मुजतबा हुसैनी ख़ामेनई ने हिज़्बुल्लाह के महासचिव और उसके लड़ाकों के पत्र के जवाब में एक संदेश जारी किया।
संदेश कुछ इस प्रकार है:
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
بسمالله الرّحمن الرّحیم
یا أَیُّهَا الَّذِینَ آمَنُواْ قَاتِلُواْ الَّذِینَ یَلُونَکُم مِنَ الْکُفّارِ وَلْیَجِدُواْ فِیکُمْ غِلْظَة...
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू
हमारे इन भाइयों और पुत्रों, अर्थात हिज़्बुल्लाह के ईमानदार और बहादुर मुजाहिदीन का पत्र प्राप्त हुआ। उसमें अल्लाह के दीन की बुलंदी, पवित्र क़ुरआन के वादों पर अटूट विश्वास तथा इमाम ख़ुमैनी (रह.) और शहीद रहबर-ए-इंक़िलाब आयतुल्लाहिल-उज़्मा सैयद अली ख़ामेनई (रह.) के सम्मानजनक उद्देश्यों पर दृढ़ता से डटे रहने का संदेश था। निस्संदेह यह पत्र अत्यंत मूल्यवान और प्रशंसा के योग्य है।
आज जब दुनिया की अनेक क़ौमें अमेरिका की सरकार और अपराधी ज़ायोनी शासन के अत्याचारों तथा मानवता को नष्ट करने वाले उनके कृत्यों से तंग आ चुकी हैं, तब जिहाद और प्रतिरोध (मुक़ावमत) के अतिरिक्त कोई मार्ग शेष नहीं रह गया है। इस मार्ग पर दृढ़ रहने वाले मुजाहिदीन को अल्लाह तआला की वादा की हुई सहायता अवश्य प्राप्त होगी।
आज हिज़्बुल्लाह लेबनान ज़ायोनी शासन और उसके समर्थकों के क्रूर हमलों के सामने चट्टान की तरह डटा हुआ है। उसकी यह दृढ़ता दुनिया की स्वतंत्र क़ौमों के लिए अत्याचार और वैश्विक अहंकार से मुक्ति का एक प्रेरणादायक संदेश बन गई है। इस महान सफलता में लेबनान की जनता, विशेष रूप से दक्षिणी लेबनान के लोगों के धैर्य, त्याग और सहयोग का बहुत बड़ा योगदान है।
इस्लामी गणराज्य ईरान भी शहीद-ए-इंक़िलाब इमाम सैयद अली ख़ामेनई (रह.) की नीति के अनुसार इन पीड़ित और साहसी मुजाहिदीन का समर्थन अपनी रणनीतिक नीति मानता है। इसी प्रकार लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा तथा ज़ायोनी शासन की आक्रामकता का पूर्ण और बिना किसी शर्त के अंत, अमेरिका द्वारा थोपी गई इस युद्ध को समाप्त करने वाले किसी भी समझौते की पहली शर्त है।
अल्लाह तआला की रहमत और कृपा उन सभी शहीदों, घायलों, उनके धैर्यवान परिवारों तथा अल्लाह की राह में हिजरत करने वालों पर नाज़िल हो, जिन्होंने महान बलिदान दिए और कठिनाइयों को सहन किया।
अल्लाह की सलामती हिज़्बुल्लाह के सैय्यदुश-शोहदा सैयद हसन नसरुल्लाह, प्रतिरोध आंदोलन के सभी पूर्व कमांडरों और उनके शहीद साथियों पर हो, जिन्होंने इस्लामी प्रतिरोध के छोटे से पौधे को एक विशाल और मजबूत वृक्ष में बदल दिया, जिसकी जड़ें गहरी और मजबूत हैं तथा जिसकी शाखाएँ आकाश तक फैली हुई हैं। यही वे मुजाहिद हैं जिन्होंने अपने संघर्ष और प्रतिरोध के माध्यम से लेबनान को पूरे इस्लामी जगत में सम्मान और गौरव प्रदान किया।
अंत में मैं दुआ करता हूँ कि हमारे आका हज़रत इमाम मेंहदी अज्जलल्लाहु तआला फरजहुश-शरीफ़ की दुआओं के सदक़े, अल्लाह तआला की विशेष कृपा और रहमत सभी मुजाहिदीन, शहीदों, ग़ाज़ियों, हिजरत करने वालों और उनके धैर्यवान परिवारों पर नाज़िल हो।
وَنُرِیدُ أَن نَّمُنَّ عَلَی الَّذِینَ اسْتُضْعِفُوا فِی الْأَرْضِ وَنَجْعَلَهُمْ أَئِمَّةً وَنَجْعَلَهُمُ الْوَارِثِینَ والسّلام علیکم و رحمة الله و برکاته۔
(क़ुरआन 28:5)
वस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू।
सैयद मुजतबा हुसैनी ख़ामेनई