अरबईन-ए-हुसैनी की महान पैदल यात्रा के दौरान नजफ़ अशरफ़ से कर्बला-ए-मुअल्ला के मार्ग पर विभिन्न देशों से आए उलेमा, तलबा (विद्यार्थी), मुबल्लिग़ (धर्म प्रचारक) और पत्रकारों ने हौज़ा न्यूज़ से विशेष बातचीत करते हुए अरबईन को इंसानियत, एकता, सेवा और उम्मत की जागृति का वैश्विक प्रतीक बताया। वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इमाम हुसैन (अ.) का संदेश किसी एक देश या क़ौम तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शक है।
अरबईन-ए-हुसैनी के अवसर पर नजफ़ अशरफ़ से कर्बला-ए-मुअल्ला तक जारी इश्क़-ए-हुसैन (अ.) की इस महान पैदल यात्रा में दुनिया भर से आए लाखों ज़ायरीन हज़रत सैय्यदुश्शोहदा इमाम हुसैन (अ.) की बारगाह की ओर बढ़ रहे हैं। इस आध्यात्मिक वातावरण में हौज़ा न्यूज़ एजेंसी ने विभिन्न देशों के उलेमा, तलबा, मुबल्लिग़, पत्रकारों और सामाजिक हस्तियों से विशेष बातचीत कर अरबईन के वैश्विक संदेश, ज़ायरीन की सेवा, उम्मते मुस्लिमा की एकता तथा इस महान आयोजन के आध्यात्मिक महत्व पर उनके विचार जानने का प्रयास किया।
रिपोर्ट के अनुसार, नजफ़ अशरफ़ से कर्बला तक का यह ऐतिहासिक सफर केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि त्याग, भाईचारा, प्रेम, सेवा, बलिदान और अत्याचार के विरुद्ध प्रतिरोध का जीवंत प्रतीक है। विभिन्न देशों से आए ज़ायरीन इस बात पर सहमत थे कि आज अरबईन एक वैश्विक मानवीय आंदोलन का रूप ले चुका है, जिसमें रंग, नस्ल, भाषा और राष्ट्रीयता की सभी सीमाएँ मिट जाती हैं।
इसी क्रम में नजफ़ अशरफ़ के हौज़ा इल्मिया में अध्ययनरत पश्चिम बंगाल (भारत) के एक छात्र ने बताया कि वे पिछले बीस दिनों से अधिक समय से मौक़िब बाक़ियतुल्लाह में लगातार ज़ायरीन की सेवा कर रहे हैं। यह मौक़िब नजफ़ अशरफ़ में रहने वाले पश्चिम बंगाल के उलेमा और तलबा द्वारा संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ज़ायरीन की सेवा स्वयं एक इबादत है और यही इमाम हुसैन (अ.) के मक्तब की वास्तविक शिक्षा है। उनका कहना था कि जब उलेमा और ज़ायरीन हौज़ा इल्मिया के छात्रों को सेवा करते हुए देखते हैं, तो दुनिया के सामने धार्मिक शिक्षण संस्थानों की एक सकारात्मक, सेवाभावी और जनकल्याणकारी छवि उभरती है, जिसके अत्यंत सुखद परिणाम सामने आते हैं।
रोज़नामा सदाए हुसैनी, हैदराबाद (दक्कन) के प्रधान संपादक मीर जाफ़र हुसैन ने बातचीत में कहा कि वे इस समय कारवाँ-ए-हिंद के मौक़िब संख्या 327 में मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि यद्यपि यह मौक़िब भारत से संबद्ध है, लेकिन यहाँ पाकिस्तान सहित अनेक देशों के बड़ी संख्या में ज़ायरीन मौजूद हैं। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि इमाम हुसैन (अ.) किसी एक देश या क़ौम के नहीं, बल्कि पूरी मानवता के इमाम हैं।
उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि पश्चिमी मीडिया और कुछ पक्षपातपूर्ण समाचार माध्यम दुनिया के सबसे बड़े मानवीय सम्मेलन की अनदेखी करते हैं। हर वर्ष दो करोड़ से अधिक लोग अरबईन की इस महान यात्रा में भाग लेते हैं, लेकिन वैश्विक मीडिया इसकी वास्तविक तस्वीर दुनिया के सामने प्रस्तुत नहीं करता।
मीर जाफ़र हुसैन ने कहा कि अरबईन में विभिन्न धर्मों और राष्ट्रीयताओं के लोग शामिल होते हैं। यदि कोई सच्ची इंसानियत, उदारता, भाईचारे और मेहमाननवाज़ी का दृश्य देखना चाहता है, तो उसे इराक़ी जनता की बेमिसाल सेवा को देखना चाहिए, जो अपने घरों, अपने दस्तरख़्वानों और अपने दिलों को ज़ायरीन के लिए खोल देती है। उन्होंने पत्रकारों, सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं और युवाओं से अपील की कि वे अरबईन के वास्तविक संदेश को पूरी दुनिया तक पहुँचाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँ।
हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना कमाल अहमद ख़ान ने कहा कि अल्लाह तआला का शुक्र है कि उसने हमें कर्बला की ओर कदम बढ़ाने का सौभाग्य प्रदान किया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक और आध्यात्मिक हिजरत की यात्रा है। इस मार्ग का हर कदम इंसान को गुनाहों से दूर और अहले बैत (अ.) के और अधिक निकट ले जाता है।
उन्होंने कहा कि आज दुनिया भर से लाखों लोगों का एक ही इमाम की ओर रुख करना इस बात का प्रमाण है कि इमाम हुसैन (अ.) आज भी उम्मते मुस्लिमा के दिलों का केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि जब इंसान की निगाह कर्बला की मंज़िल पर होती है, तो रास्ते की सारी कठिनाइयाँ आसान लगने लगती हैं। इसी प्रकार, यदि इंसान अपनी ज़िंदगी का उद्देश्य इमाम-ए-ज़माना (अ.ज.) की रज़ा और अल्लाह की हिदायत को बना ले, तो दुनिया की मुश्किलें भी आसान हो जाती हैं।
पाकिस्तान से संबंध रखने वाले तथा मशहद मुक़द्दस में निवासरत प्रचारक हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना मूसा रज़ा नक़वी ने कहा कि अरबईन की यात्रा केवल शारीरिक कठिनाई का नाम नहीं, बल्कि एक महान आध्यात्मिक प्रशिक्षण केंद्र है। उन्होंने कहा कि ज़ायरीन को चाहिए कि इस यात्रा के दौरान अधिक से अधिक मुहम्मद व आले मुहम्मद (अ.) के ज़िक्र में मशगूल रहें, व्यर्थ की बातचीत और निरर्थक कार्यों से बचें तथा हर क्षण हज़रत सैय्यदुश्शोहदा इमाम हुसैन (अ.) से अपने हृदय के संबंध को और मजबूत करें।
उन्होंने कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जिन महान हस्तियों की याद में हम यह यात्रा कर रहे हैं, उन्होंने इसी मार्ग को अत्यंत कठिन परिस्थितियों, भूख, प्यास और अनेक कष्टों के साथ तय किया था। इसलिए अरबईन से लौटते समय ज़ायरीन केवल शारीरिक थकान ही नहीं, बल्कि तक़वा, इख़लास, मारिफ़त और आध्यात्मिक पूँजी भी अपने साथ लेकर जाएँ।
ईरान की राजधानी तेहरान से संबंध रखने वाले प्रचारक हुज्जतुल इस्लाम अहमद सारअल्लाही ने कहा कि अरबईन एक ऐसी वैश्विक आध्यात्मिक क्रांति है जिसने पूरी दुनिया के लोगों के दिलों में अहले बैत (अ.) की मोहब्बत और इमाम हुसैन (अ.) की मारिफ़त को और गहरा कर दिया है। उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों से आने वाले ज़ायरीन के भीतर आध्यात्मिक, वैचारिक और क्रांतिकारी जागरूकता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि पूरे रास्ते ज़ायरीन के चेहरों पर ऐसा प्रतीत होता है मानो वे आशूरा के मैदान में इमाम हुसैन (अ.) की सहायता के लिए उपस्थित हों और अपने आचरण से "या लैतना कुन्ना मआकुम" (काश! हम भी आपके साथ होते) की व्यावहारिक व्याख्या प्रस्तुत कर रहे हों। उनके अनुसार इमाम हुसैन (अ.) की मोहब्बत दिलों में ऐसी आकर्षण शक्ति पैदा करती है, जो इंसान को विलायत, सत्य और इमाम-ए-ज़माना (अ.ज.) के ज़ुहूर की तैयारी की ओर ले जाती है।
हौज़ा न्यूज़ से बातचीत करने वाली सभी हस्तियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि अरबईन केवल एक धार्मिक सम्मेलन नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेम, सेवा, एकता, त्याग, बलिदान और अत्याचार के विरुद्ध दृढ़ता का वैश्विक संदेश है। उन्होंने कहा कि नजफ़ से कर्बला तक लाखों लोगों की यह पैदल यात्रा दुनिया को यह सिखाती है कि जब उद्देश्य ईश्वरीय हो, तो भाषा, नस्ल, जाति और सीमाएँ अपना महत्व खो देती हैं और इंसान केवल इमाम हुसैन (अ.) के परचम तले एक उम्मत बन जाता है।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि अरबईन का यह महान आंदोलन भविष्य में भी दुनिया भर में सत्य, न्याय, स्वतंत्रता, मानवीय मूल्यों और अहले बैत (अ.) की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार का प्रभावी माध्यम बना रहेगा तथा इसका संदेश हर वर्ष पहले से अधिक शक्ति के साथ पूरी दुनिया तक पहुँचता रहेगा।
अफ़ग़ानिस्तान से संबंध रखने वाले हुज्जतुल इस्लाम सैय्यद मुर्तज़ा हुसैन अफ़ग़ानी ने कहा कि अरबईन-ए-हुसैनी दुनिया भर के मज़लूमों, सत्य के चाहने वालों और अहले बैत (अ.) के अनुयायियों को एक मंच पर एकत्र करने वाला महान ईश्वरीय आंदोलन है। उन्होंने कहा कि नजफ़ से कर्बला तक की यह पैदल यात्रा इंसान के ईमान, सब्र, इख़लास और विलायत से जुड़ाव को और अधिक मज़बूत करती है।
उन्होंने कहा कि अरबईन का सबसे बड़ा संदेश उम्मते मुस्लिमा में एकता, भाईचारे और मानव सेवा को बढ़ावा देना है। विभिन्न भाषाओं, जातियों और देशों से आए लाखों लोगों का एक ही उद्देश्य के लिए एकत्र होना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि इमाम हुसैन (अ.) का आंदोलन पूरी मानवता के लिए आशा, स्वतंत्रता तथा सत्य और न्याय का संदेश रखता है।
हुज्जतुल इस्लाम सैय्यद मुर्तज़ा हुसैन अफ़ग़ानी ने ज़ायरीन से अपील की कि वे इस आध्यात्मिक यात्रा को अपने नैतिक और आध्यात्मिक सुधार का माध्यम बनाएँ, इमाम हुसैन (अ.) के उद्देश्यों को अपने व्यावहारिक जीवन में लागू करें और कर्बला से लौटकर अपने समाज में प्रेम, न्याय, एकता और मानव सेवा के प्रसार के लिए सक्रिय भूमिका निभाएँ।





