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बड़ी ही हकीदत के साथ कर्बला के शहीदों की याद में निकाला गया जुलूस

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बड़ी ही हकीदत के साथ कर्बला के शहीदों की याद में निकाला गया जुलूस

सरयमीर, आजमगढ़।सरायमीर नगर में अंजुमन तंजीम-ए-हुसैनी के तत्वावधान में गुरुवार को चेहल्लम-ए-शोहदाए कर्बला का जुलूस निकाला गया। जिसमें बड़ी संख्या में अजादारों और अकीदतमंदों ने भाग लिया।

इस जुलूस से पहले चौक स्थित वक्फ इमामबाड़ा तस्कीन-ए-जैनब में मजलिस-ए-अजा आयोजित हुई।जिसमें उलेमा ने वाक्या-ए-कर्बला,शहादत-ए-इमाम हुसैन और शोहदाए कर्बला की अजीम कुर्बानियों पर विस्तार से रोशनी डाली।

मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना मासूमअसगर मारूफी ने कहा कि कर्बला सिर्फ तारीख का एक वाक्या नहीं, बल्कि हक और बातिल के बीच फर्क स्पष्ट करने वाला अजीम सबक है।

मजलिस के बाद शबीहे जुलजनाह,ताबूत, अलम-ए-मुबारक और ताजिया के साथ जुलूस-ए-अजा बरामद हुआ। अजादार नौहाख्वानी और सीनाजनी करते हुए इमाम हुसैन अ.स. को पूरसा पेश किए इस मौके पर जुलूस में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए।

और शोहदा ए कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश की। रौजा अली आशिकान के पास तकरीर करते हुए मौलाना कौसर रजा नकवी ने कहा कि इमाम हुसैन और उनके वफादार असहाब ने तादाद में कम होने के बावजूद जुल्म व जब्र के सामने सिर नहीं झुकाया। जुलूस अपने क़दीम

रास्तों से होता हुआ मेन रोड पर पहुंचा तो लब्बैक या हुसैन के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। जुलूस के आखिर में शोहदाए कर्बला के 72 शहीदों के शबीहे ताबूत की जियारत कराई गई। सैयद जीशान अली निजामाबादी ने संबोधित किया।

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