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आज के समाज को वली-ए-खुदा की पैरवी करनी चाहिए । हुज्जतुल इस्लाम पीर देहकान

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आज के समाज को वली-ए-खुदा की पैरवी करनी चाहिए । हुज्जतुल इस्लाम पीर देहकान

हुज्जतुल इस्लाम सैयद अब्दुर्रज़ाक पीरदेहकान ने कहा कि इंसान और समाज जब ईश्वरीय मार्गदर्शन से दूर होकर अवज्ञा का रास्ता अपनाते हैं, तो वे भटकाव और मुश्किलों में फंस सकते हैं। उन्होंने कहा कि अल्लाह की बड़ी नेमतों में से एक यह है कि उसने इंसानों की हिदायत और रहनुमाई के लिए पैगंबरों को उनके बीच भेजा। पैगंबर इंसान का हाथ थामकर उसे मुश्किलों और परेशानियों से निकलने का रास्ता दिखाते हैं।

हरम में आयोजित तफ्सीरे कुरआन की महफिल में उन्होंने सूरह अल-मायदा की आयत 20 से 26 की व्याख्या करते हुए कहा कि कुरआन में पिछली कौमों के वाकयात केवल इतिहास बताने के लिए नहीं हैं, बल्कि उनमें आज के इंसान के लिए भी महत्वपूर्ण नैतिक और तरबीयत सबक मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि इसी वजह से कुरआन पैगंबर-ए-इस्लाम को पिछली उम्मतों और उनके हालात को लोगों के सामने बयान करने का निर्देश देता है, ताकि इंसान उनके अनुभवों से सीख सके।

हुज्जतुल इस्लाम पीरदेहकान ने हज़रत मूसा (अ.स.) और बनी इस्राईल के वाकये का उल्लेख करते हुए कहा कि हज़रत मूसा (अ.स.) ने अपनी कौम को संबोधित करते समय ‘या कौम’ यानी ‘ऐ मेरी कौम’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। इससे यह संदेश मिलता है कि किसी व्यक्ति या समाज को भलाई और सही रास्ते की ओर बुलाते समय उसमें हमदर्दी, करुणा और सच्ची खैरख्वाही होनी चाहिए। जब सामने वाले को यह महसूस होता है कि सलाह उसकी भलाई के लिए दी जा रही है, तो उसके स्वीकार करने की संभावना भी बढ़ जाती है।

उन्होंने कहा कि सूरह अल-मायदा की इन आयतों में अल्लाह की नेमतों को याद करने पर विशेष जोर दिया गया है। बनी इस्राईल को अल्लाह ने फिरऔन के अत्याचार से निजात दिलाई और उनके लिए ऐसी परिस्थितियां पैदा कीं जिनमें उनके सामने बंद रास्ते खुल गए।

उन्होंने कहा कि इन नेमतों को याद करना इंसान के अंदर ईमान, अल्लाह पर भरोसा और मुश्किल परिस्थितियों में उम्मीद को मजबूत करता है। इससे इंसान समझता है कि कठिन समय में भी अल्लाह की मदद उसके लिए निजात का रास्ता खोल सकती है।

उन्होंने आगे कहा कि हिदायत और मार्गदर्शन भी अल्लाह की बड़ी नेमत है। अल्लाह ने इंसानों की रहनुमाई के लिए पैगंबरों को भेजा, ताकि वे लोगों को सही और गलत के बीच फर्क समझाएं और कठिन परिस्थितियों से निकलने का रास्ता बताएं।

हुज्जतुल इस्लाम पीरदेहकान के अनुसार, अल्लाह की नेमतों को याद करने से इंसान के अंदर वली-ए-खुदा पर भरोसा पैदा होता है और वह ऐसी स्थिति में भी उनके आदेश का पालन कर सकता है, जब किसी आदेश की पूरी वजह और हिकमत उसे तुरंत समझ में न आए।

हुज्जतुल इस्लाम पीरदेहकान ने कहा कि बनी इस्राईल की नाफरमानी का परिणाम यह हुआ कि वह मुकद्दस सरज़मीन उनके लिए प्रतिबंधित कर दी गई और वे वर्षों तक धरती पर भटकते रहे। उन्होंने कहा कि यह घटना आज के इंसान और समाज के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश रखती है कि ईश्वरीय मार्गदर्शन से दूरी और वली-ए-खुदा की अवज्ञा इंसान को भटकाव और बंद रास्तों की ओर ले जा सकती है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर आज का इंसान और समाज वली-ए-खुदा की आज्ञा का पालन करने का अभ्यास करे, तो वह वास्तव में ईश्वरीय नेतृत्व को स्वीकार करने की अपनी क्षमता को मजबूत करेगा और हज़रत वली-अस्र (अज.) के ज़ुहूर के लिए खुद को तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाएगा।

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