इज़राइली शासन के राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन संस्थान के शोधकर्ता दानी सिट्रीनॉविच ने ईरान के खिलाफ अमेरिका के नए प्रतिबंधों का आकलन करते हुए कहा कि वॉशिंगटन की हालिया कार्रवाई ने तेहरान पर दबाव बनाने की नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है।
उन्होंने उन देशों को दंडित करने की अमेरिका की धमकी का उल्लेख किया जो ईरान के साथ आर्थिक संबंध जारी रखते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य मुद्दा नए प्रतिबंधों की घोषणा नहीं, बल्कि यह है कि क्या वॉशिंगटन वास्तव में उन देशों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तैयार है जो ईरान की मदद जारी रखे हुए हैं।इस इज़राइली शोधकर्ता ने कहा,कुछ भी नया नहीं है; वास्तव में कोई नई बात सामने नहीं आई है।
सिट्रीनॉविच ने आगे कहा कि ईरानी मुद्रा रियाल के मूल्य में गिरावट, बढ़ती महंगाई और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर काफी दबाव डाला है। हालांकि, अब तक यह दबाव ईरानी शासन को पीछे हटने के लिए मज़बूर करने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा चरण में अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान पर दबाव बढ़ाना और तेहरान के विश्व के साथ आर्थिक संपर्क के रास्तों को सीमित करना है। हालांकि, इस लक्ष्य के सामने एक बड़ी बाधा है कुछ शक्तियों का ईरान के साथ आर्थिक सहयोग जारी रखना, विशेष रूप से चीन और तुर्की।
इस आकलन के अनुसार, यदि वॉशिंगटन वास्तव में ईरान की विदेशी संसाधनों और बाजारों तक पहुंच सीमित करना चाहता है, तो उसे उन देशों का सामना करना पड़ेगा जो प्रतिबंधों के दबाव को कुछ हद तक निष्प्रभावी कर सकते हैं। इससे अमेरिका पर महत्वपूर्ण आर्थिक और भू-राजनीतिक लागत पड़ सकती है।
इज़राइली सुरक्षा हलकों के दृष्टिकोण से, केवल आर्थिक प्रतिबंध अब तक तेहरान की रणनीतिक गणनाओं को बदलने में सफल नहीं हुए हैं। अमेरिका की अधिकतम दबाव की नीति की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि वॉशिंगटन ईरान के आर्थिक साझेदार देशों के साथ किस तरह व्यवहार करता है।