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हुज्जतुल-इस्लाम वल मुस्लिमीन सफ़ाई बुशहरी जनता की सेवा करना, संस्कृति ए रिज़वी का व्यावहारिक रूप है

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हुज्जतुल-इस्लाम वल मुस्लिमीन सफ़ाई बुशहरी जनता की सेवा करना, संस्कृति ए रिज़वी का व्यावहारिक रूप है

हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन ग़ुलामअली सफ़ाई बुशहरी ने आज आस्तान-ए-क़ुद्स रिज़वी के कुछ अधिकारियों से मुलाक़ात के दौरान हज़रत इमाम रज़ा (अ.स.) के पवित्र आस्ताने में की जा रही गतिविधियों और सेवाओं की सराहना की।

उन्होंने कहा कि आस्तान-ए-क़ुद्स रिज़वी के प्रबंधन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक जनता पर विशेष ध्यान देना और संस्कृति-ए-रिज़वी की दृष्टि से लोगों का सम्मान करना है।

बुशहर के इमाम ए जुमआ ने इस संस्थान में हुए बदलावों की ओर संकेत करते हुए कहा कि दूरदर्शी सोच और उच्च मनोबल के साथ प्रशासनिक कार्यों को आगे बढ़ाना ऐसी महत्वपूर्ण विशेषताएँ हैं, जो जनता के लिए सेवाओं के विस्तार और परिवर्तन का आधार बन सकती हैं।

उन्होंने अहले-बैत (अ.स.) की सीरत और जनता के सम्मान की आवश्यकता की ओर संकेत करते हुए कहा कि संस्कृति-ए-रिज़वी सम्मान, गरिमा और लोगों के बीच आशा पैदा करने पर आधारित है। जो भी व्यक्ति अहले-बैत (अ.स.) के दर पर उम्मीद लेकर आता है, उसे निराशा का अनुभव नहीं होना चाहिए।

बुशहर प्रांत में वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि ने पिछले वर्षों में आस्तान-ए-क़ुद्स रिज़वी में हुए प्रशासनिक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न दौर में इस संस्थान में मूल्यवान कार्य किए गए हैं। निर्माण और विकास संबंधी गतिविधियों के बाद अब सांस्कृतिक, सामाजिक और सॉफ्टवेयर आधारित योजनाओं को भी गंभीरता से आगे बढ़ाया गया है।

हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन सफ़ाई बुशहरी ने दिवंगत आयतुल्लाह तबसी और शहीद आयतुल्लाह सैयद इब्राहीम रईसी की याद को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि शहीद रईसी की जनता और जनसेवा के प्रति विशेष सोच थी। वे अपने व्यवहार और प्रशासनिक शैली में सादगी, समानता और जनता पर ध्यान देने पर ज़ोर देते थे।

उन्होंने आगे कहा कि आस्तान-ए-क़ुद्स रिज़वी को अपनी व्यापक क्षमताओं का इस्तेमाल करते हुए हज़रत इमाम रज़ा (अ.स.) की सोच और संस्कृति को पूरे ईरान तक पहुँचाना चाहिए और देश के सभी लोगों को रिज़वी संस्कृति की सेवाओं और बरकतों के दायरे में लाना चाहिए।

बुशहर प्रांत में वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि ने कहा कि अतीत में देशभर के बहुत से लोगों की निगाहें मशहद और हज़रत इमाम रज़ा (अ.स.) की ज़ियारत पर रहती थीं, लेकिन आज यह संबंध दोतरफ़ा होना चाहिए। यानी जिस तरह लोग मशहद की ओर रुख करते हैं, उसी तरह मशहद और हज़रत इमाम रज़ा (अ.स.) का पवित्र आस्ताना भी व्यापक दृष्टिकोण अपनाते हुए पूरे ईरान और जनता की आवश्यकताओं पर ध्यान दे।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि संस्कृति-ए-रिज़वी का विस्तार और जनता की सेवा की भावना को विकसित करना, आस्तान-ए-क़ुद्स रिज़वी और देशभर की जनता के बीच आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को मजबूत करने का आधार बन सकता है।

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