Print this page

इमाम ए जुमआ तेहरान: आर्थिक नाकाबंदी दुश्मनों की हार का कारण बनेगी

Rate this item
(0 votes)
इमाम ए जुमआ तेहरान: आर्थिक नाकाबंदी दुश्मनों की हार का कारण बनेगी

आयतुल्लाह सैयद अहमद खातमी ने आज तेहरान की जुमआ की नमाज़ के ख़ुत्बे में कहा कि हमारे हर काम का एक ज़ाहिरी पहलू और एक आंतरिक पहलू होता है। क़यामत के दिन इंसान अपने किए हुए कामों की वास्तविकता को देखेगा। उस दिन इंसान को केवल उसके कर्मों का बदला नहीं मिलेगा, बल्कि उसके कर्म स्वयं भी उसके सामने होंगे। वास्तव में इंसान अपने आख़िरत के भविष्य को खुद तय करता है; जन्नत भी इंसान अपने कर्मों से बनाता है और जहन्नम भी।

तेहरान के अस्थायी इमाम-ए-जुमआ ने आर्थिक दबाव और पैग़म्बर-ए-इस्लाम स.ल.व. की सीरत का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्थिक दबाव और आर्थिक नाकाबंदी कोई नई चीज़ नहीं है, जिसे ट्रंप ने शुरू किया हो। इस्लाम के आरंभिक दौर से ही इसका इतिहास मौजूद है।

उन्होंने कहा कि सूरह अनफ़ाल की आयत 36 में उन लोगों का उल्लेख है जो धर्म का मुकाबला करने के लिए अपना धन खर्च करते हैं। अंततः उन्हें अपने खर्च पर पछताना पड़ता है और उन्हें एहसास होता है कि उनकी कोशिशें बेनतीजा रहीं। वे नाकाम होते हैं और हार जाते हैं तथा आख़िरत में भी बुरे अंजाम का सामना करेंगे।

आयतुल्लाह खातमी ने कहा कि मुनाफ़िक़ों के बारे में सूरह अल-मुनाफ़िक़ून की आयत 7 में उल्लेख है कि वे कहते थे कि अल्लाह के रसूल स.ल.व. के पास मौजूद मुसलमानों की मदद न करो, ताकि वे पैग़म्बर के आसपास से बिखर जाएं।

उन्होंने कहा कि क़ुरआन आज भी प्रासंगिक है और यह बिल्कुल वही आर्थिक नाकाबंदी है, जिसे अमेरिका आज लागू कर रहा है और जिसके पीछे भी यही उद्देश्य है। लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जिस तरह इस्लाम के शुरुआती दौर के दुश्मन पराजित हुए थे, उसी तरह ये लोग भी निश्चित रूप से हारेंगे।

उन्होंने जोर देकर कहा कि आर्थिक दबाव और आर्थिक नाकाबंदी का उद्देश्य जनता और व्यवस्था के बीच दूरी पैदा करना तथा हक़ के मोर्चे को कमजोर करना है, लेकिन इस्लाम के शुरुआती दौर का अनुभव साबित करता है कि ऐसी नीतियां अंततः दुश्मनों की हार का कारण बनती हैं।

इमाम-ए-जुमआ ने कहा कि पैग़म्बर-ए-अकरम स.ल.व. ने आर्थिक दबाव का मुकाबला दो महत्वपूर्ण सिद्धांतों के जरिए किया और इस दबाव को पार कर लिया। इनमें पहला सिद्धांत माल के माध्यम से जिहाद है।

जिहाद का अर्थ प्रयास और संघर्ष है, जिसमें कठिनाइयां भी शामिल होती हैं। यह कभी सैन्य क्षेत्र में होता है, कभी आर्थिक क्षेत्र में ‘प्रतिरोधी अर्थव्यवस्था’ के रूप में और कभी विचारों एवं सच्चाई को स्पष्ट करने के क्षेत्र में ‘जिहाद-ए-तबलीग़/तबयीन’ के रूप में सामने आता है।

उन्होंने कहा कि आज हमारा युद्ध पूरी तरह हाइब्रिड युद्ध है। इसमें सैन्य युद्ध भी शामिल है, जो अब भी अन्यायपूर्ण और क्रूर है। युद्ध के अपने नियम होते हैं, लेकिन ट्रंप नियमों का पालन करने वाले व्यक्ति नहीं हैं।

उन्होने कहा कि स्कूल के 168 बच्चों का क्या गुनाह था? दुनिया के सभी कानूनों में बच्चों को सुरक्षा प्राप्त है, लेकिन दुश्मन लोगों की खुशियों को मातम में बदल देता है। इसलिए सभी के लिए यह स्पष्ट हो गया है कि यह एक अन्यायपूर्ण युद्ध है। हालांकि, हमारी सशस्त्र सेनाएं इस अन्यायपूर्ण युद्ध का सबसे उच्च और बहादुराना तरीके से जवाब दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि सैन्य युद्ध के साथ-साथ आर्थिक युद्ध भी जारी है। वास्तव में यह युद्ध क्रांति की जीत से पहले से ही दुश्मनों द्वारा शुरू किया गया था। इसके अलावा मीडिया युद्ध, इस्लामी गणराज्य ईरान के खिलाफ झूठ फैलाना और सांस्कृतिक युद्ध भी जारी है। आर्थिक युद्ध भी इसी का एक हिस्सा है। हमें इस क्षेत्र में भी वही करना चाहिए जो पैग़म्बर-ए-अकरम स.ल.व. ने किया था।

अंत में आयतुल्लाह खातमी ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि आप लोगों ने लगभग 190 रातों और छह महीने से अधिक समय तक सड़कों को अपने समर्थन से भर दिया है। इस मोर्चे पर इस्लामी व्यवस्था की मदद करना बेहद जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे जिहादी भावना के साथ काम करते हुए आर्थिक समस्याओं को हल करने या कम करने का प्रयास करें, क्योंकि जनता का यह अधिकार है कि अधिकारी उसके लिए इसी तरह काम करें। साथ ही जनता को भी अपनी क्षमता के अनुसार इस्लामी व्यवस्था की मदद करनी चाहिए।

Read 5 times