ईरान के शहर संदेरज की नमाज़-ए-जुमआ के इस सप्ताह के ख़ुत्बे में मौलवी फ़ायक़ रुस्तमी ने कहा कि अमेरिका हमेशा दुनिया में मानवाधिकारों की रक्षा का दावा करता है, लेकिन आज वह मुसलमानों, विशेष रूप से मध्य पूर्व के लोगों के खिलाफ़ विभिन्न प्रकार के अपराध कर रहा है। उन्होंने कहा कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य मुसलमानों की दौलत और प्राकृतिक संसाधनों को लूटना है।
उन्होंने आगे कहा कि परमाणु ज्ञान से लाभ उठाना हर देश का अधिकार है और कोई भी किसी दूसरे देश को इस ज्ञान को हासिल करने से नहीं रोक सकता।
कुर्दिस्तान के प्रतिनिधि ने मजलिस-ए-ख़बरगान-ए-रहबरी में कहा कि अगर दुनिया की महाशक्तियां यह चाहती हैं कि इस महत्वपूर्ण और जीवनोपयोगी ज्ञान पर केवल उनका अधिकार हो, तो यह खुला अन्याय और सरासर ज़ुल्म है।
मौलवी फ़ायक़ रुस्तमी ने कहा कि आज दुनिया को शांति और आपसी समझ की आवश्यकता है। लूटपाट और सैन्य आक्रमण का दौर अब समाप्त हो जाना चाहिए, क्योंकि दुनिया के लोग शांति, सुरक्षा और सुख-समृद्धि चाहते हैं।
संदेरज के इमाम-ए-जुमआ ने ईरानी जनता की सक्रिय भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि इस्लामी क्रांति और इस्लामी व्यवस्था की रक्षा के लिए ईरानी जनता को मैदान में उतरे हुए 191 दिन बीत चुके हैं, जो इस्लामी ईरान के प्रति उनकी वफ़ादारी और प्रतिबद्धता की स्पष्ट निशानी है।