हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन मलिकी ने मदरसों में पढ़ाई और आध्यात्मिक गतिविधियों के प्रति उत्साह पैदा करने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि अच्छा और आगे बढ़ने वाला हौज़ा तभी बनाया जा सकता है, जब प्रबंधक, कर्मचारी और शिक्षक मिलकर ऐसे छात्रों को तैयार करें, जो समाज और लोगों की जरूरतों को समझते हों और अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने की क्षमता रखते हों।
क़ुम हौज़ा इल्मिया के कार्यवाहक प्रमुख हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन मलिकी ने कहा कि एक अच्छा और आगे बढ़ने वाला हौज़ा तभी बनाया जा सकता है, जब प्रबंधक, शिक्षक और कर्मचारी मिलकर ऐसे छात्रों को तैयार करें, जो धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ समाज और लोगों की जरूरतों को भी अच्छी तरह समझते हों।
क़ुम के रज़वी मदरसे में नए शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने शिक्षकों, प्रबंधकों, कर्मचारियों और छात्रों को नए शैक्षणिक वर्ष की बधाई दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि हक़ और बातिल के बीच संघर्ष में हक़ की जीत होगी और ईरान की जनता के सिर से युद्ध का खतरा जल्द दूर होगा।
उन्होंने रज़वी मदरसे के पुराने शैक्षिक और प्रशिक्षण इतिहास की सराहना करते हुए कहा कि यह मदरसा लंबे समय से अपनी अच्छी पहचान रखता है। उन्होंने बताया कि उन्हें भी इस मदरसे में छात्र के रूप में पढ़ने और उस्ताद फुतूही जैसे महान शिक्षकों से शिक्षा लेने का अवसर मिला है। उन्होंने मदरसे के पूर्व प्रबंधकों और शिक्षकों की सेवाओं की भी सराहना की।
मलिकी ने कहा कि किसी भी मदरसे की सफलता के लिए योग्य प्रबंधक, अच्छे शिक्षक और मेहनती कर्मचारी बहुत जरूरी हैं। इन तीनों के मिलकर काम करने से मदरसे की शिक्षा और व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है।
उन्होंने छात्रों के चरित्र निर्माण में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि छात्र का सबसे अधिक संपर्क शिक्षक से होता है। शिक्षक का व्यवहार, बातचीत, अनुशासन और सोच छात्र के व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव डालते हैं। इसलिए शिक्षक को केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने अच्छे व्यवहार से छात्रों में ज्ञान, आध्यात्मिकता और शिक्षा के प्रति प्रेम पैदा करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पढ़ाई और आध्यात्मिक गतिविधियों के प्रति उत्साह छात्रों के लिए बहुत जरूरी है। मदरसों में ऐसा वातावरण बनाया जाना चाहिए, जिससे छात्र कठिन और लंबे शैक्षिक सफर को उत्साह के साथ पूरा कर सकें।
मलिकी ने कहा कि क़ुम दुनिया में शिया धार्मिक शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र है, इसलिए यहां के मदरसों का स्तर ऊंचा होना चाहिए। छात्रों को धार्मिक शिक्षा के साथ सामान्य जानकारी, सामाजिक व्यवहार, बोलने और लिखने की क्षमता तथा लोगों की जरूरतों को समझने की योग्यता भी हासिल करनी चाहिए।
उन्होंने छात्रों को शहीद मुतह्हरी, इमाम ख़ुमैनी और अन्य महान विद्वानों की किताबों का अध्ययन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ऐसी किताबों से छात्रों की वैज्ञानिक और वैचारिक समझ मजबूत होती है। अंत में उन्होंने कहा कि शिक्षक, प्रबंधक और कर्मचारी मिलकर ऐसे योग्य छात्रों को तैयार करें, जो समाज की सही तरीके से सेवा कर सकें।