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यमन क्षेत्र की एक प्रभावशाली ताकत बन चुका है।अंसारुल्लाह

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यमन क्षेत्र की एक प्रभावशाली ताकत बन चुका है।अंसारुल्लाह

यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के राजनीतिक कार्यालय ने यमनी क्रांति की वर्षगांठ के अवसर पर कहा कि इस क्रांति ने यमन को क्षेत्रीय स्तर पर एक सक्रिय भूमिका दी है। यमनी जनता आक्रमण और घेराबंदी खत्म होने तथा देश की संप्रभुता और स्वतंत्रता हासिल होने तक अपना संघर्ष जारी रखेगा।

, अंसारुल्लाह ने कहा कि आक्रमण के सामने यमनी जनता का दृढ़ रहना इस क्रांति की प्रमुख विशेषता है।

आंदोलन ने कहा कि यमन ने ग़ाज़ा के समर्थन और वहां जारी जनसंहार के विरोध में अपनी मानवीय और नैतिक जिम्मेदारी भी निभाई है।

सना सरकार के गृह मंत्री मेजर जनरल अब्दुल करीम अल-हौसी ने कहा कि सुरक्षा संस्थान दुश्मन की साजिशों और विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

उन्होंने बताया कि पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में नागरिकों को सुरक्षा और प्रशासनिक सेवाएं उपलब्ध कराने का काम भी शुरू कर दिया गया है।

यमन की सर्वोच्च राजनीतिक परिषद के प्रमुख महदी अल-मशात ने तटीय क्षेत्रों में यमनी सशस्त्र बलों की कार्रवाइयों को “संप्रभुता लागू करने और सऊदी सैन्य बलों को बाहर निकालने के लिए राष्ट्रीय अभियान” बताया हैं।

गौरतलब है कि 21 सितंबर 2014 को जनता के विरोध प्रदर्शनों और सशस्त्र झड़पों के बाद राजधानी सना में महत्वपूर्ण राजनीतिक केंद्र अंसारुल्लाह के नियंत्रण में आ गए थे। इसके बाद सऊदी समर्थित सरकार को हटा दिया गया और अंसारुल्लाह यमन की एक प्रमुख राजनीतिक ताकत के रूप में सामने आया।

इससे पहले, सादा में सऊदी समर्थित सलफ़ी समूहों के साथ गंभीर झड़पों के बाद जनवरी 2014 में दमाज से सलफ़ियों की वापसी हुई थी। इसके बाद अंसारुल्लाह ने सादा में अपना नियंत्रण और मजबूत कर लिया।

2014 की गर्मियों में अंसारुल्लाह ने राजनीतिक, नागरिक और आर्थिक सुधारों की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन भी किए। इन प्रदर्शनों के बाद सरकार को इस्तीफा देना पड़ा।

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