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जीवन के सभी मामलों में इमाम ए जमाना अ.स.की रज़ामंदी को ध्यान में रखा जाए

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जीवन के सभी मामलों में इमाम ए जमाना अ.स.की रज़ामंदी को ध्यान में रखा जाए

 ईरान के बुशहर प्रांत के इमाम ए जुमआ और बुशहर में वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन गुलाम अली सफाई बुशहरी ने कहा कि इमाम-ए-जमाना हज़रत इमाम मेंहदी (अ.स) की पहचान केवल इस बात तक सीमित नहीं होनी चाहिए कि वे जीवित इमाम हैं, बल्कि लोगों को अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में उनकी हिदायत, मार्गदर्शन और रज़ामंदी के महत्व को समझना चाहिए।

 मस्जिद ए जमकरान के मुतवल्ली से मुलाकात के दौरान हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन गुलाम अली सफाई बुशहरी ने कहा कि इंसान को वास्तविक मार्गदर्शन, भलाई और सफलता अल्लाह की हुज्जत से संबंध के माध्यम से प्राप्त होती है। इसलिए ज़रूरी है कि महदवियत की शिक्षाओं को आम किया जाए और लोगों को बताया जाए कि शादी, परिवार, बच्चों की परवरिश और सामाजिक मामलों सहित ज़िंदगी के विभिन्न क्षेत्रों में इमाम-ए-जमाना (अ.स.) की रज़ामंदी को ध्यान में रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अगर इंसान अपने फैसलों और कार्यों में इमाम-ए-जमाना (अ.स.) की रज़ामंदी को अपना मापदंड बनाए, तो उसके जीवन-शैली और फैसलों में भी सुधार आएगा।

उन्होंने कहा कि बुशहर प्रांत में हज़रत इमाम महदी (अ.स.) से प्रेम रखने वाले लोगों के केंद्र और मस्जिद-ए-जमकरान के प्रतिनिधित्व का नेटवर्क सक्रिय है। इन संस्थाओं को और मजबूत करने तथा आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हौज़ा-ए-इल्मिया की क्षमताओं से भी लाभ उठाया जाना चाहिए।

उन्होंने बुशहर के लोगों के लिए मस्जिद-ए-जमकरान में विशेष कार्यक्रम, ज़ियारती और सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा विभिन्न महदवी गतिविधियां आयोजित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बुशहर के लोगों का अहले-बैत (अ.स.) और पवित्र स्थलों से गहरा संबंध है, जिसे महदवी क्षेत्र में भी और मजबूत किया जाना चाहिए।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सफाई बुशहरी ने इस बात पर भी जोर दिया कि इंसान अपने कार्यों में लोगों की प्रशंसा के बजाय इमाम-ए-जमाना (अ.स.) की रज़ामंदी को ध्यान में रखे। उन्होंने कहा कि कभी-कभी ऐसा नेक काम भी करना चाहिए जिसकी जानकारी दूसरों को न हो, क्योंकि असली मापदंड अल्लाह और इमाम-ए-जमाना (अ.स.) की रज़ामंदी है।

उन्होंने मस्जिद-ए-जमकरान को इबादत और आध्यात्मिकता का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए आम लोगों, विशेष रूप से युवाओं के इस पवित्र मस्जिद के साथ आध्यात्मिक संबंध को और मज़बूत करने पर ज़ोर दिया।

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