कर्बला निवासी इराकी धर्मगुरु आयतुल्लाह सय्यद मोहम्मद तक़ी मुदर्रेसी ने पिछले दो दशकों के दौरान इराक और ईरान की जनता के बीच देखे गए घनिष्ठ सहयोग और भाईचारे के संबंधों की सराहना की।
कर्बला निवासी इराकी धर्मगुरु आयतुल्लाह सय्यद मोहम्मद तक़ी मुदर्रेसी ने पिछले दो दशकों में इराक और ईरान की जनता के बीच बने घनिष्ठ सहयोग और भाईचारे के संबंधों की सराहना की। यह संबंध संकट के समय और कठिन परिस्थितियों में स्पष्ट रूप से सामने आए हैं और कई मौकों पर दोनों देशों की जनता के बीच सहयोग एक ही वतन के लोगों जैसी एकजुटता के स्तर तक पहुंच गया है।
उन्होंने कर्बला-ए-मौअल्ला स्थित अपने कार्यालय में साप्ताहिक नैतिकता के पाठ के दौरान इराकी सरकार के कुछ ऐसे फैसलों और कदमों की आलोचना की, जो जनता और धार्मिक नेतृत्व के दृष्टिकोण से दूर हैं। इनमें इमाम हुसैन (अ) और इराक के अन्य पवित्र तीर्थस्थलों की ज़ियारत के लिए आने वाले जायरीन की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाना तथा ज़ियारत के लिए आने वाले लोगों के लिए हवाई और ज़मीनी रास्ते बंद करना शामिल है। उन्होंने कहा कि यह कदम एक पड़ोसी देश और मुस्लिम जनता पर लगाए गए प्रतिबंधों के जवाब में उठाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ईरान के रास्ते इराक आने वाले सभी लोग ईरानी नहीं होते, बल्कि उनमें विभिन्न देशों और राष्ट्रीयताओं के जायरीन भी शामिल होते हैं, जिनका एक ही धार्मिक उद्देश्य होता है, यानी पवित्र तीर्थस्थलों की ज़ियारत करना और धार्मिक अनुष्ठानों को अंजाम देना। इसलिए इन जायरीन की आवाजाही के साथ उनके धार्मिक उद्देश्य के आधार पर व्यवहार किया जाना चाहिए, न कि देशों के बीच राजनीतिक मतभेदों और राजनीतिक रुख के आधार पर।
आयतुल्लाह मुदर्रेसी ने स्पष्ट किया कि यह मामला मुसलमानों के हज के लिए जाने जैसा है। राजनीतिक मतभेद और देशों के बीच विवाद होने के बावजूद यह स्वीकार्य नहीं रहा है कि उन मतभेदों को हज यात्रियों को बैतुल्लाह पहुंचने से रोकने या उन्हें उनके धार्मिक कर्तव्यों को पूरा करने के लिए ले जाने वाले विमानों, बसों और अन्य वाहनों को रोकने का साधन बनाया जाए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों और जायरीन की आवाजाही को राजनीतिक संघर्षों में शामिल करना तथा लोगों को पवित्र स्थलों तक पहुंचने से रोकना या उनकी राह में रुकावट पैदा करना देशों के बीच दबाव बनाने का साधन नहीं बनना चाहिए। क्योंकि इससे लोगों के धार्मिक अनुष्ठानों को पूरा करने के अधिकार को नुकसान पहुंचता है और व्यवहार में यह धर्म तथा उसके धार्मिक अनुष्ठानों के विरोध का रूप ले सकता है।
उन्होंने कहा कि इराकी अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे जायरीन की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने के बजाय विभिन्न हवाई और ज़मीनी रास्तों से उनके प्रवेश को आसान बनाने का प्रयास करें तथा हवाई अड्डों, सड़कों, सीमा चौकियों और बुनियादी ढांचे का विस्तार करें, ताकि यह व्यवस्था उन करोड़ों जायरीन और यात्रियों की आवश्यकताओं के अनुरूप हो, जो हर वर्ष इराक और उसके पवित्र तीर्थस्थलों को अपना गंतव्य बनाते हैं।
इस इराकी धर्मगुरु ने कहा कि उम्मत के दुश्मन हमेशा ऐसे रास्ते तलाशते रहते हैं, जिनके माध्यम से वे क्षेत्र के लोगों के बीच विभाजन पैदा कर सकें और उनके बीच संपर्क, सहयोग तथा एकजुटता के पुलों को तोड़ सकें। उन्होंने इस दिशा में होने वाले दबावों और निर्देशों के आगे झुकने से सावधान किया, क्योंकि ऐसे कदम मुस्लिम देशों पर प्रभुत्व स्थापित करने और उनकी जनता को कमजोर करने के अवसर पैदा करते हैं।
उन्होंने अंत में मुस्लिम जनता के बीच भाईचारे के संबंधों को बनाए रखने और इस बात की अनुमति न देने की आवश्यकता पर जोर दिया कि अस्थायी राजनीतिक मतभेद और हित उनके बीच संपर्क के रास्तों को बंद कर दें या ईमान वाले लोगों को धार्मिक अनुष्ठानों और पवित्र स्थलों की ज़ियारत से रोकें।