दक्षिण 24 परगना के राजनगर में पैगंबर हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स) के पवित्र जीवन, आदर्श चरित्र, ज्ञान, नेतृत्व और मानवता के लिए उनकी बेमिसाल सेवाओं को उजागर करने के उद्देश्य से ‘रहमतुल्लिलआलमीन’ के शीर्षक से एक ज्ञानवर्धक एवं वैचारिक सेमिनार आयोजित किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े लोगों ने भाग लिया।
दक्षिण 24 परगना के राजनगर में हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स) के पवित्र जीवन, आदर्श चरित्र, ज्ञान, नेतृत्व और मानवता के लिए उनकी बेमिसाल सेवाओं को उजागर करने के उद्देश्य से ‘रहमतुल्लिलआलमीन’ के शीर्षक से एक ज्ञानवर्धक एवं वैचारिक सेमिनार आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने भाग लिया।
दक्षिण 24 परगना जिले के कुलपी थाने के अंतर्गत राजनगर क्षेत्र में आयोजित इस सेमिनार में स्थानीय लोगों के अलावा विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े श्रोताओं ने भी भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य पैगंबर हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (सल्लल्लाहु अलैहि वआलेहि वसल्लम) के पवित्र जीवन और उनकी व्यापक शिक्षाओं को वर्तमान समय के संदर्भ में समझने तथा उन्हें व्यावहारिक जीवन में अपनाने की आवश्यकता को उजागर करना था।
सेमिनार के मुख्य वक्ता नूरुलइस्लाम अकादमी के संस्थापक एवं सचिव डॉ. मौलाना रिज़वानुल इस्लाम खान ने अपने संबोधन में पैगंबर-ए-अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वआलेहि वसल्लम) की आज्ञापालन और सुन्नत-ए-नबवी पर वास्तविक रूप से अमल करने के महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि पैगंबर-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वआलेहि वसल्लम) का अनुसरण अपनी इच्छा या सुविधा के अनुसार नहीं, बल्कि अल्लाह तआला के आदेश के अनुसार होना चाहिए। उन्होंने कुरआन करीम में वर्णित ‘उलुलअम्र’ के विषय पर भी प्रकाश डाला और अल्लाह के आदेशों, पैगंबर-ए-अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वआलेहि वसल्लम) की आज्ञापालन तथा उनके बाद नेतृत्व के विषय को इस्लामी शिक्षाओं की रोशनी में स्पष्ट किया।
दूसरे वक्ता, हावड़ा जिले के उलुबेरिया से आए ‘राह-ए-हक़’ के सचिव शेख मुश्ताक अहमद ने पैगंबर-ए-अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वआलेहि वसल्लम) के बहुआयामी व्यक्तित्व और ज्ञान पर आधारित नेतृत्व के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
उन्होंने कहा कि पैगंबर-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वआलेहि वसल्लम) के पवित्र जीवन को केवल धार्मिक रस्मों तक सीमित नहीं किया जा सकता, बल्कि इसमें ज्ञान, सामाजिक सुधार, न्याय एवं समानता, आर्थिक सिद्धांत, मानवीय मूल्यों और समाज के मार्गदर्शन के लिए व्यापक शिक्षाएं मौजूद हैं।
वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि पैगंबर-ए-अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वआलेहि वसल्लम) की सीरत को समझना और उनकी शिक्षाओं को अपने व्यक्तिगत एवं सामूहिक जीवन में लागू करना हर मुसलमान की जिम्मेदारी है। उन्होंने ज्ञान प्राप्त करने, अच्छे आचरण, न्याय एवं समानता, मानवता, आपसी सम्मान और सत्य पर दृढ़ रहने को सीरत-ए-नबवी (सल्लल्लाहु अलैहि वआलेहि वसल्लम) के महत्वपूर्ण संदेशों में शामिल बताया।
सेमिनार के अंत में दरूद व सलाम का नज़राना पेश किया गया और समाज में शांति एवं सुरक्षा, सभी प्रतिभागियों की भलाई तथा पूरी मानवता की भलाई के लिए विशेष दुआ की गई।
राजनगर में आयोजित ‘रहमतुल्लिलआलमीन’ सेमिनार ने प्रतिभागियों को पैगंबर-ए-अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वआलेहि वसल्लम) के पवित्र जीवन, उनकी ज्ञानवर्धक एवं नैतिक शिक्षाओं तथा मानव समाज के लिए उनके मार्गदर्शन को और गहराई से समझने का अवसर प्रदान किया।