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अल्लामा मोहम्मद तक़ी जाफ़री की जिंदगी का शिक्षाप्रद वाकया; तक़वा और विलायत की झलक

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अल्लामा मोहम्मद तक़ी जाफ़री की जिंदगी का शिक्षाप्रद वाकया; तक़वा और विलायत की झलक

आयतुल्लाह अल्लामा मोहम्मद तक़ी जाफ़री (र) की जिंदगी में पेश आने वाला एक शिक्षाप्रद वाकया तक़वा, नफ़्स पर नियंत्रण और अहले बैत अलैहिमुस्सलाम से प्रेम के महत्व को उजागर करता है। उन्होंने अपनी युवावस्था में एक ऐसे आध्यात्मिक अनुभव का उल्लेख किया था, जिसे वह अपनी जिंदगी की महत्वपूर्ण रूहानी घटनाओं में शामिल करते थे।

अल्लामा मोहम्मद तक़ी जाफ़री (र) ने बताया कि हौज़ा इल्मिया तबरेज़ में दाखिला लेने से एक साल पहले उन्होंने सपने में देखा कि किसी व्यक्ति ने अपने हाथों से उन्हें दूध का प्याला दिया और उन्होंने उसे पी लिया। जब उन्होंने पूछा कि यह किसका हाथ था, तो बताया गया कि यह हज़रत अली इब्ने अबी तालिब अलैहिस्सलाम का हाथ था।

अल्लामा जाफ़री ने अपने छात्र जीवन का एक और वाकया बयान करते हुए कहा कि नजफ़ अशरफ़ में एक वर्ष भीषण गर्मी पड़ी और गर्मी की शिद्दत के कारण कई लोगों की मौत भी हो गई। उनका कमरा भी इतना गर्म था कि वहां रहना मुश्किल था। इसलिए वह अपना समय अपने दोस्तों के कमरे में बिताते थे।

एक रात कुछ छात्र एकत्र थे। एक छात्र शेख हैदर अली ने अखबार का एक टुकड़ा निकाला, जिस पर एक खूबसूरत महिला की तस्वीर छपी हुई थी। उन्होंने वहां मौजूद छात्रों से मजाक में पूछा कि अगर किसी व्यक्ति को यह विकल्प दिया जाए कि वह इस महिला के साथ एक हजार साल तक शरीअत और कानून के अनुसार जीवन बिताए या केवल एक बार हज़रत अली अलैहिस्सलाम का दीदार करे, तो वह क्या चुनेगा?

कुछ छात्रों ने सांसारिक जीवन को प्राथमिकता दी। जब अल्लामा जाफ़री की बारी आई और उन्होंने तस्वीर देखने के लिए उसे हाथ में लिया तो अचानक उनका चेहरा दूसरी ओर मुड़ गया। वह तुरंत उठकर अपने कमरे में चले गए।

अल्लामा जाफ़री के अनुसार, कमरे में बैठे हुए उन्होंने अचानक अपने सामने एक व्यक्ति को देखा और उसके पास एक युवक भी मौजूद था। उन्होंने उस युवक से पूछा कि यह व्यक्ति कौन है? जवाब मिला, “यह खुद अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम हैं।”

अल्लामा जाफ़री ने बताया कि उन्होंने हज़रत अली (अ) के चेहरे में वे सभी विशेषताएं देखीं, जिनका उल्लेख रिवायतों में आपके स्वरूप और व्यक्तित्व के संबंध में किया गया है। कुछ देर बाद जब उन्हें होश आया तो उन्होंने खुद को कमरे में अकेला पाया।

इसके बाद वह दोबारा छात्रों के पास गए। वहां मौजूद लोगों ने उनके बदले हुए चेहरे और हालत को देखकर इसकी वजह पूछी। अल्लामा जाफ़री ने पूरा वाकया बताया तो सभी छात्र प्रभावित हुए और उन्होंने अखबार में छपी तस्वीर को टुकड़े-टुकड़े कर दिया।

इस घटना के बाद सैयद इस्माइल ने शेख हैदर अली से कहा कि भविष्य में इस तरह का मजाक न करें, क्योंकि हम इस परीक्षा में असफल हो गए।

अल्लामा जाफ़री ने आगे बताया कि नजफ़ की भीषण गर्मी के दौरान छात्र रात में अपने शरीर का कुछ हिस्सा पानी में डुबोकर और दीपक की रोशनी में सुबह तक अध्ययन किया करते थे। उन्होंने कहा कि हज़रत अली अलैहिस्सलाम के दीदार के बाद जब वह किताबें खोलते तो उन्हें ऐसा महसूस होता था कि वे इन विषयों को पहले ही पढ़ चुके हैं।

स्रोत: किताब ‘याद-ए-यार; 160 ख़ातेरात अज़ उस्ताद अल्लामा जाफ़री

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