क़ुद्स फ़ोर्स के कमांडर जनरल इस्माइल क़ाआनी ने कहा है कि सैयद हसन नसरल्लाह और अन्य कमांडरों की शहादत के बावजूद हिज़्बुल्लाह की नई पीढ़ी ने युद्ध के मैदान में मजबूती से प्रतिरोध किया और इज़राइली सेना के 373 टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को निशाना बनाया।
जनरल क़ाआनी ने तेहरान में प्रतिरोध मोर्चे के शहीद कमांडरों की दूसरी बरसी के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हिज़्बुल्लाह ने अपने इतिहास के सबसे कठिन युद्धों में से एक में मज़बूती से मुकाबला किया और इज़राइल को भारी जनहानि उठानी पड़ी।
उन्होंने कहा कि सैयद हसन नसरल्लाह और अन्य कमांडरों की शहादत के बावजूद हिज़्बुल्लाह की नई पीढ़ी मैदान में उतरी और इस तरह युद्ध लड़ा कि दोस्त और दुश्मन दोनों हैरान रह गए।
जनरल क़ाआनी के अनुसार, युद्ध शुरू होने और सैयद हसन नसरल्लाह की शहादत के दो दिन बाद ही हिज़्बुल्लाह के लड़ाके मैदान में उतर आए और अब तक बहादुरी के साथ मुकाबला कर रहे हैं। उन्होंने इसे हिज़्बुल्लाह की स्थापना के बाद के सबसे कठिन युद्धों में से एक बताया।
उन्होंने दावा किया कि इस युद्ध में इज़राइली शासन को पिछले दौरों की तुलना में अधिक जनहानि हुई, लेकिन वह अपने नुकसान के आंकड़े छिपा रहा है। उनके मुताबिक, हिज़्बुल्लाह के नए लड़ाकों ने ऐसी लड़ाई लड़ी, जिसमें लगभग 373 टैंक और बख्तरबंद वाहन उनके हमलों का निशाना बने।
क़ुद्स फ़ोर्स के कमांडर ने कहा कि सैयद हसन नसरल्लाह और सैयद हाशिम सफ़ीउद्दीन की कोशिशों और भूमिका ने हिज़्बुल्लाह को प्रतिरोध के एक स्कूल में बदल दिया। उन्होंने दोनों नेताओं के जीवन को ज्ञान, सम्मान और महानता से भरपूर बताया और कहा कि उनका प्रभाव आज भी हिज़्बुल्लाह के कामकाज में दिखाई देता है।
उन्होंने आगे कहा कि सैयद अब्बास मूसवी की शहादत के बाद सैयद हसन नसरल्लाह और सैयद हाशिम सफ़ीउद्दीन ने हिज़्बुल्लाह को उस मुकाम तक पहुंचाया कि आज वह लेबनान और प्रतिरोध मोर्चे के लिए गर्व का कारण है। उनके अनुसार, हिज़्बुल्लाह स्वयं प्रतिरोध का प्रतीक बनने के साथ अन्य राष्ट्रों और समूहों के लिए भी एक उदाहरण बन गया है।
यमन की स्थिति का उल्लेख करते हुए जनरल क़ाआनी ने कहा कि यमनी जनता 11 वर्षों से अधिक समय की नाकाबंदी के बावजूद मजबूत संकल्प के साथ प्रतिरोध के रास्ते पर आगे बढ़ रही है।
उन्होंने दावा किया कि यमनी बलों ने अपने अभियानों के पहले चरण में 5,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर कब्जा किया, जो ईरान-इराक युद्ध के दौरान बैतुल मुकद्दस अभियान में मुक्त कराए गए क्षेत्र के बराबर है, जबकि एक हजार वर्ग किलोमीटर अतिरिक्त क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रक्रिया जारी है।
जनरल क़ाआनी ने कहा कि अमेरिका तमाम संसाधनों और शक्ति के बावजूद इराक से निकलने के लिए मजबूर हुआ और इराकी जनता ने प्रतिरोध के कारण इस सफलता का जश्न मनाया।