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इस्लामी क्रांति की सफलता इमामौ के इख़्लास का परिणाम है।

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इस्लामी क्रांति की सफलता इमामौ के इख़्लास का परिणाम है।

हौज़ा-ए-इल्मिया ईरान की सुप्रीम काउंसिल के सचिव आयतुल्लाह मुहम्मद मेंहदी शब ज़िंन्दा दार से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हार्मुज़गान जैसे विशेष परिस्थितियों वाले क्षेत्र में धार्मिक सेवाएं देना “افضل الاعمال احمزها,अफ़ज़लुल-अअमाल अह्मज़ुहा” के सिद्धांत के अनुसार एक श्रेष्ठ कार्य है।

,हौज़ा-ए-इल्मिया ईरान की सुप्रीम काउंसिल के सचिव आयतुल्लाह मुहम्मद मेंहदी शब ज़िंन्दा दार से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हार्मुज़गान जैसे विशेष परिस्थितियों वाले क्षेत्र में धार्मिक सेवाएं देना “افضل الاعمال احمزها,अफ़ज़लुल-अअमाल अह्मज़ुहा” के सिद्धांत के अनुसार एक श्रेष्ठ कार्य है।

आयतुल्लाह शबज़िंदादार ने “अहसन अमला” की व्याख्या करते हुए कहा कि इंसान को अपनी ज़िंदगी के हर फैसले और कार्य में पूरी कोशिश करनी चाहिए कि वह अल्लाह की नज़र में सबसे अच्छे अमल करने वालों में शामिल हो। उन्होंने इमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) की एक रिवायत का हवाला देते हुए कहा कि “अहसन अमला” का पैमाना केवल अधिक अमल करना नहीं है, बल्कि यह है कि इंसान अपने कार्यों में धार्मिक और नैतिक मूल्यों से कितना जुड़ा हुआ है।

उन्होंने “अहसन अमला” के प्रमुख आधारों में अल्लाह का भय और उसकी निकटता के लिए नेक नीयत को बताया। उन्होंने कहा कि भय और ख़शियत में अंतर है। भय से आशय अल्लाह के अज़ाब का डर है, जबकि ख़शियत अल्लाह की पहचान और उसकी महानता को समझने से पैदा होने वाली आध्यात्मिक अवस्था है।

शिक्षकों को संबोधित करते हुए आयतुल्लाह शबज़िंदेदार ने कहा कि जो शिक्षक “अहसन अमला” बनना चाहता है, उसे विद्यार्थियों का सच्चा हितैषी होना चाहिए। उसे नियमित अध्ययन करना, विषयों को अच्छी तरह विद्यार्थियों तक पहुंचाना, समय की पाबंदी करना और आध्यात्मिकता को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षक की आध्यात्मिकता से विद्यार्थी केवल शैक्षिक रूप से ही लाभ नहीं उठाते, बल्कि उसके आध्यात्मिक प्रभावों से भी प्रभावित होते हैं।

उन्होंने हाल ही में दिवंगत हुए आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद मूसा शुबैरी ज़ंजानी की विद्वता, विनम्रता और सादगी को श्रद्धांजलि देते हुए उनके निधन को एक बड़ा वैज्ञानिक और धार्मिक नुकसान बताया।

आयतुल्लाह शबज़िंदादार ने इस्लामी क्रांति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी और शहीद रहबर-ए-इंक़लाब की प्रमुख विशेषता को इख़लास (निष्कपटता) बताते हुए कहा कि इस्लामी क्रांति की सफलता इसी इख़लास का परिणाम है। इसी इख़लास ने क्रांति को दुश्मनों द्वारा पैदा की गई विभिन्न कठिनाइयों के सामने मजबूती और स्थिरता प्रदान की।

इस अवसर पर हौज़ा-ए-इल्मिया हार्मुज़गान के प्रमुख हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन नादिर हक़ीक़ी ने प्रांत के 13 सक्रिय मदरसों, विशेषज्ञता के क्षेत्रों और प्रचार-प्रसार संबंधी गतिविधियों की रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि प्रांत में लगभग 900 प्रचारक विभिन्न धार्मिक प्रचार योजनाओं में सक्रिय हैं, जिनमें लगभग 450 प्रचारक “अमीन” योजना से जुड़े हुए हैं। उन्होंने महंगाई और आवासीय समस्याओं सहित प्रांत के धार्मिक वर्ग को दरपेश विभिन्न कठिनाइयों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया।

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