अमेरिका में मस्जिदों के लिए पार्किंग की सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर कई स्थानों पर स्थानीय प्रशासन के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, जहां चर्च और यहूदी धार्मिक स्थलों सहित अन्य उपासना स्थलों के लिए शहर की योजनाओं में पार्किंग की व्यवस्था की जाती है, वहीं मस्जिदों के लिए पार्किंग उपलब्ध कराने में विशेष रूप से कैलिफ़ोर्निया में नगरपालिकाओं की ओर से उल्लेखनीय विरोध देखा गया है।
सांता बारबरा इस्लामिक एसोसिएशन ने वर्ष 2019 में अपनी नई मस्जिद का उद्घाटन किया। उस समय तक संस्था को संपत्ति खरीदे हुए लगभग 19 वर्ष बीत चुके थे, जिनमें करीब 10 वर्ष नगर प्रशासन से अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया में लग गए। मस्जिद के निर्माण और उससे संबंधित अनुमतियों की प्रक्रिया 16 सार्वजनिक सुनवाइयों और बैठकों के दौरान विलंबित होती रही। इन बैठकों में गोलेटा शहर के निवासियों, जिनमें स्थानीय मुसलमान भी शामिल थे, ने कई चिंताएं व्यक्त कीं। इनमें नमाज़ के लिए आने वाले लोगों के वाहनों की पार्किंग का मुद्दा भी शामिल था, क्योंकि नगर प्रशासन ने मस्जिद के लिए पार्किंग स्थल बनाने की अनुमति नहीं दी थी।
किसी अधिक आवाजाही वाले धार्मिक स्थल के लिए पार्किंग को लेकर चिंता सामान्य रूप से उचित लग सकती है। हालांकि, कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय, सांता क्रूज़ और यूसीएलए के शहरी वास्तुकला के शोधकर्ताओं के अनुसार, नई मस्जिदें बनाने वाले मुस्लिम समुदायों को पार्किंग व्यवस्था से संबंधित मामलों में असमान रूप से अधिक विरोध का सामना करना पड़ता है। शोधकर्ताओं ने इसे मुस्लिम समुदायों के प्रति पूर्वाग्रह का संकेत बताया है।
अमेरिकन प्लानिंग एसोसिएशन की एक प्रमुख शहरी नियोजन पत्रिका में प्रकाशित उनके शोध के अनुसार, आसपास की नई चर्च इमारतों की तुलना में नई मस्जिदों के निर्माण का विरोध होने की संभावना 16 से 18 प्रतिशत अधिक पाई गई। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह अंतर केवल संयोग से होने की अपेक्षा से काफी अधिक है।
कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय, सांता क्रूज़ में राजनीतिक और कानूनी अध्ययन के प्रोफेसर तथा इस अध्ययन के प्रमुख लेखक मार्क फ़ेथी मसूद ने कहा कि अमेरिका के कई क्षेत्रों में धर्म और धार्मिक अल्पसंख्यकों के बढ़ते प्रभाव को लेकर भय पाया जाता है, जबकि धार्मिक स्वतंत्रता को महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने कहा कि जब मुसलमानों के लिए पार्किंग की कमी और धर्म से जुड़े मुद्दों को एक साथ देखा जाता है, तो इससे समाज में एक प्रकार का अंतर्निहित भेदभाव पैदा हो सकता है।