जम्मू-कश्मीर जाफ़रिया सुप्रीम काउंसिल, मुज़फ़्फ़राबाद के अध्यक्ष एडवोकेट सैयद ज़ैव्वार हुसैन नक़वी ने सऊदी अरब और यमन के बीच जारी तनाव के संदर्भ में कहा है कि पाकिस्तान का यमन युद्ध में पक्षकार बनना कुरआन की शिक्षाओं और उम्मत की एकता के विरुद्ध होगा। उन्होंने पाकिस्तान, तुर्किये और अन्य मुस्लिम देशों से अपील की कि वे युद्ध में शामिल होने के बजाय युद्धविराम, न्यायपूर्ण सुलह और स्थायी शांति स्थापित करने के लिए प्रभावी भूमिका निभाएं तथा यमन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान सुनिश्चित करें।
सैयद ज़ैव्वार हुसैन नक़वी ने यमन के खिलाफ सऊदी आक्रामकता से पैदा हुई वैश्विक और क्षेत्रीय स्थिति पर अपने बयान में सऊदी अरब और यमन के बीच तनाव समाप्त करने पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से मक्का रक्षा समझौते के सदस्य देशों पाकिस्तान और तुर्किये सहित सभी मुस्लिम देशों से अपील की कि वे पवित्र कुरआन की सूरह अल-हुजुरात की शिक्षाओं के अनुसार दोनों देशों के बीच युद्धविराम, न्यायपूर्ण सुलह और स्थायी शांति स्थापित करने में प्रभावी भूमिका निभाएं, न कि युद्ध का हिस्सा बनें।
उन्होंने कहा कि विवादों का समाधान कुरआनी शिक्षाओं के अनुरूप न्याय और निष्पक्षता के आधार पर किया जाना चाहिए। यमन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा सुनिश्चित की जाए तथा सना सरकार के आत्मरक्षा के अधिकार को स्वीकार किया जाए।
सैयद ज़ैव्वार हुसैन नक़वी ने स्पष्ट किया कि यमन में सरकार बनाने का अधिकार केवल यमनी जनता को है। अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों और कानूनों के अनुसार, सऊदी अरब सहित किसी भी दूसरे देश को यमन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने और वहां की जनता की इच्छा के विरुद्ध अपने हितों की पूर्ति के लिए अपनी पसंद की सरकार थोपने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि जनता के प्रतिरोध के परिणामस्वरूप यमन में बाहरी हस्तक्षेप और समर्थन से तीन दशकों से अधिक समय तक कायम रहने वाली तानाशाही के समाप्त होने के बाद, विदेशी हस्तक्षेप के जरिए दोबारा कोई तानाशाही व्यवस्था यमनी जनता पर थोपना अस्वीकार्य होगा। इसके परिणाम पश्चिम एशिया सहित पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए बेहद गंभीर हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि यमन मुस्लिम बहुल देश है और हूती आंदोलन (यमन का अंसारुल्लाह) अपने इतिहास, विचारधारा, इस्लामी पहचान और जनसमर्थन के कारण एक प्रमुख राजनीतिक एवं धार्मिक आंदोलन है। उनके अनुसार, सना सरकार और हूती आंदोलन के लिए मक्का मुकर्रमा तथा मदीना मुनव्वरा उतने ही पवित्र और सम्मानित हैं, जितने अन्य मुसलमानों के लिए हैं।
उन्होंने आगे कहा कि हूती आंदोलन पर मक्का मुकर्रमा को निशाना बनाने का आरोप निराधार है और ऐसा प्रतीत होता है कि यह आरोप राजनीतिक तथा सैन्य उद्देश्यों की पूर्ति के लिए लगाया जा रहा है। मुस्लिम देशों को चाहिए कि इस आरोप की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए प्रभावी कदम उठाएं, ताकि वास्तविक तथ्यों को सामने लाया जा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि पवित्र स्थलों की गरिमा की मांग है कि ठोस सबूतों के बिना किसी भी पक्ष को दोषी न ठहराया जाए।
सैयद ज़ैव्वार हुसैन नक़वी ने ताहिर अशरफ़ी द्वारा यमन की जनता में लोकप्रिय और इस्लाम समर्थक हूती आंदोलन को काफिर घोषित करने वाले बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने मांग की कि ताहिर अशरफ़ी अपने तकफ़ीरी बयान के लिए यमनी और पाकिस्तानी जनता से माफी मांगें।
उन्होंने कहा कि किसी को काफिर घोषित करने वाले ऐसे बयान विभिन्न इस्लामी विचारधाराओं के बीच सद्भाव और मुस्लिम एकता के लिए नुकसानदेह हैं। मुस्लिम देशों के आपसी विवादों को सांप्रदायिक रंग देने के बजाय तथ्यों, सबूतों, न्याय और निष्पक्षता के आधार पर उनका आकलन किया जाना चाहिए। जहां ज्यादती हो, उसकी निंदा की जाए और जहां सुलह संभव हो, वहां न्यायपूर्ण समाधान के लिए प्रयास किए जाएं।
उन्होंने अंत में कहा कि मुस्लिम उम्मत की एकता धार्मिक नफरत और आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि कुरआन की शिक्षाओं, आपसी सम्मान और मज़लूमों के अधिकारों की रक्षा से मज़बूत होगी।