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हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स.अ.दुनिया की तमाम मुस्लिम महिलाओं के लिए सबसे पवित्र आदर्श हैं

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हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स.अ.दुनिया की तमाम मुस्लिम महिलाओं के लिए सबसे पवित्र आदर्श हैं

हुज्जतुल इस्लाम मौलाना मोहम्मद सईदी वे कहां, हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स.अ. त्याग, परोपकार, दुआओं की क़बूलियत और करामात में अद्वितीय थीं।

 हुज्जतुल इस्लाम मौलाना मोहम्मद सईदी ने हज़रत फ़ातिमा ज़हेरा स.अ.की शहादत की बरसी के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) त्याग, परहेज़गारी, दूसरों के लिए क़ुर्बानी और करामात के मामले में बेमिसाल थीं। उनके जन्म की शुभ सूचना हज़रत जिब्रईल (अ.स.) ने पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा स.अ.व. को दी थी।

मस्जिदे स़ारुल्लाह में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लिया। मौलाना मोहम्मद सईदी ने कहा कि हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) के नैतिक गुणों में एक प्रमुख विशेषता यह थी कि वह अपनी सुख-सुविधाओं से पहले दूसरों की ज़रूरतों को प्राथमिकता देती थीं।

उन्होंने कहा कि हज़रत अली अ.स.के साथ उनका वैवाहिक जीवन, आध्यात्मिक और पारिवारिक दृष्टि से उच्च स्थान रखने के बावजूद, सादगी, संतोष, मेहनत और कठिन परिस्थितियों में एक-दूसरे का साथ देने पर आधारित था।

मौलाना सईदी ने कहा कि हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) ने अपने परिवार में इमाम हसन (अ.स.), इमाम हुसैन (अ.स.), हज़रत ज़ैनब (स.अ.) और उम्मे कुलसूम (स.अ.) जैसी महान हस्तियों का पालन-पोषण किया। इन सभी ने इस्लाम के इतिहास और शिया संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया।

उन्होंने आगे कहा कि माँ होना केवल एक पारिवारिक ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह ऐसी प्रभावशाली भूमिका है, जिसके माध्यम से उन व्यक्तित्वों का निर्माण होता है जो भविष्य में समाज की समस्याओं और बदलावों के सामने अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाने में सक्षम होते हैं।

मौलाना सईदी ने कहा कि हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) का व्यक्तित्व और उनके संघर्ष विभिन्न पहलुओं से इंसानों, विशेषकर महिलाओं, के लिए बेमिसाल संदेश और शिक्षा रखते हैं।

उन्होंने कहा कि इस्लामी क्रांति के शहीद नेता आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामेनेई के कथन के अनुसार, हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) मुस्लिम महिलाओं ही नहीं, बल्कि दुनिया की तमाम महिलाओं के लिए सबसे सुंदर, उच्च और पवित्र आदर्श हैं। वह सभी मुसलमानों के लिए एक संपूर्ण आदर्श और अनुकरणीय व्यक्तित्व हैं।

उन्होंने आगे कहा कि हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) ने राजनीतिक संघर्षों के मैदान में अपनी भूमिका निभाकर यह साबित किया कि वह पैग़म्बरी के मिशन और इमामत के बीच एक मज़बूत कड़ी थीं।

मौलाना मोहम्मद सईदी ने अंत में कहा कि आज की महिलाएँ भी हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) के जीवन और शिक्षाओं को अपनाकर धार्मिक मूल्यों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। आत्मनिर्माण, ज़िम्मेदारी की भावना, धार्मिक मूल्यों की रक्षा, दान-परोपकार, त्याग, दृढ़ता, धैर्य और कठिनाइयों का सामना करने की भावना को अपनाकर महिलाएँ आज की दुनिया में अपने वास्तविक और सम्मानजनक स्थान को प्राप्त कर सकती हैं।

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