ईरान में महिला मदरसों के प्रमुख हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मेहदी अलीज़ादेह ने कहा है कि ‘महिला, जीवन, स्वतंत्रता’ के नारे के नाम पर साजिश रचने में दुश्मन नाकाम रहा है। उन्होंने कहा कि महिला इस्लामी मदरसों में शिक्षा प्राप्त करने के प्रति लोगों की बढ़ती रुचि इस बात का संकेत है।
हुज्जतुल इस्लाम मेंहदी अलीज़ादेह ने क़ुम के इस्लामी मदरसे के छात्रों और विद्वानों की प्रतिनिधि परिषद की योजना एवं कार्यक्रम समिति के सदस्यों से मुलाकात के दौरान महिला छात्रों की भूमिका और प्रभाव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महिला मदरसों और जामेअतुल ज़हेरा (स.ल.) में शिक्षा प्राप्त करने वाली छात्राओं का समाज में महत्वपूर्ण स्थान है। उनके अनुसार, महिला मदरसों में दाखिले के प्रति बढ़ता रुझान दुश्मन की योजनाओं की विफलता को दर्शाता है।
महिला मदरसों के प्रमुख ने आगे कहा कि जब भी दुश्मन ने प्रत्यक्ष युद्ध का सहारा लिया, तो इस्लाम और धार्मिक शिक्षाओं के प्रति लोगों की रुचि बढ़ी। इसके विपरीत जब दुश्मन सांस्कृतिक और वैचारिक युद्ध का रास्ता अपनाता है, तो पश्चिमी विचार संस्थानों के समर्थन से समाज की पसंद और सोच को धीरे-धीरे प्रभावित करने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष में महिलाओं की भूमिका दोनों पक्षों के लिए विशेष महत्व रखती है।
हुज्जतुल इस्लाम अलीज़ादेह ने कहा कि वैचारिक और सांस्कृतिक बदलाव की साजिश में उन महिलाओं को आगे किया जाता है, जिनकी रुचियों को सोशल मीडिया पर मिलने वाले लाइक और गैर-धार्मिक प्रवृत्तियों की ओर मोड़ने का प्रयास किया जाता है।
उन्होंने कहा कि महिला मदरसों की ओर से ऐसी कोशिशों का मुकाबला करने के लिए समाज की सोच और रुचियों को धार्मिक मूल्यों की ओर प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि क़ुम के छात्रों और विद्वानों की प्रतिनिधि परिषद इस दिशा में महत्वपूर्ण सहयोग करेगी।
मुलाकात की शुरुआत में हुज्जतुल इस्लाम बचारी ने योजना एवं कार्यक्रम समिति की जिम्मेदारियों और कार्यक्षेत्र के बारे में जानकारी दी। उन्होंने प्रतिनिधि परिषद के गठन, उसके मूल उद्देश्यों और विभिन्न क्षमताओं का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, देश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिनिधियों की मौजूदगी और प्रांतीय दौरों के माध्यम से कार्यक्रमों के विकास तथा उन्हें बेहतर बनाने में मदद मिली है।