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अय्यामे फातिमिया (स) का वास्तविक संदेश हज़रत ज़हरा (स) की सीरत का अनुसरण करना है

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अय्यामे फातिमिया (स) का वास्तविक संदेश हज़रत ज़हरा (स) की सीरत का अनुसरण करना है

मौलाना मोहम्मद ज़का अल-हसन ने जुमे के खुतबों को संबोधित करते हुए कहा कि तक़वा-ए-इलाही, कुरआनी महिलाओं की सीरत तथा इमामत और विलायत की रक्षा अय्यामे फातिमिया (स) के महत्वपूर्ण संदेश हैं। महिलाओं को हज़रत फातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के जीवन से शिक्षा लेनी चाहिए।

 पाकिस्तान के शहर अलीपुर में 30 अक्टूबर 2026 को जामिया इल्मिया इमाम हसन अस्करी, घलवां, अलीपुर में जुमे के खुतबों और नमाज़े जुमा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मोहम्मद ज़का अल-हसन, जो हौज़ा इल्मिया क़ुम के विद्वान और जामिया इल्मिया इमाम हसन अस्करी (अ) घलवां, अलीपुर के प्रिंसिपल हैं, ने संबोधित किया।

उन्होंने जुमे के खुतबों में तक़वा-ए-इलाही, कुरआनी महिलाओं की सीरत, अय्यामे फातिमिया (स) के अवसर पर हमारी जिम्मेदारियों और हज़रत फातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।

अय्यामे फातिमिया (स) का वास्तविक संदेश हज़रत ज़हरा (स) की सीरत का अनुसरण करना है: मौलाना मोहम्मद ज़का अल-हसन

अय्यामे फातिमिया (स) का वास्तविक संदेश हज़रत ज़हरा (स) की सीरत का अनुसरण करना है।

पहले खुतबे में मौलाना मोहम्मद ज़का अल-हसन ने तक़वा-ए-इलाही के महत्व को बयान करते हुए कुरआनी महिलाओं की सीरत और उनके जीवन को महिलाओं के लिए आदर्श बताया।

 

अय्यामे फातिमिया (स) का वास्तविक संदेश हज़रत ज़हरा (स) की सीरत का अनुसरण करना है: मौलाना मोहम्मद ज़का अल-हसन

उन्होंने अय्यामे फातिमिया (स) के अवसर पर हज़रत हव्वा और हज़रत फातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहिमा सहित उन महान महिलाओं के जीवन से शिक्षा लेने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिन्होंने अपनी पवित्र जीवनशैली, चरित्र और बंदगी के माध्यम से मानवता का मार्गदर्शन किया।

उन्होंने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि महिलाओं को अपने जीवन में तक़वा, पवित्रता, धैर्य, त्याग और धार्मिक जिम्मेदारियों को महत्व देना चाहिए तथा कुरआनी और इस्लामी शिक्षाओं के प्रकाश में अपने व्यक्तित्व और चरित्र का निर्माण करना चाहिए।

दूसरे खुतबे में उन्होंने अय्यामे फातिमिया (स) के संदर्भ में ईमान वालों की जिम्मेदारियों और व्यावहारिक कर्तव्यों पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने हज़रत फातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की सीरत, महान व्यक्तित्व, सद्गुणों एवं विशेषताओं, त्याग और बलिदान तथा इमामत और विलायत की रक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं को उजागर किया।

उन्होंने इस अवसर पर कहा कि अय्यामे फातिमिया (स) केवल श्रद्धा व्यक्त करने और मजलिसों में शामिल होने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इन दिनों में हज़रत फातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की शिक्षाओं, सीरत और व्यावहारिक जीवन को समझने तथा उन्हें अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में अपनाने का प्रयास करना चाहिए। विशेष रूप से इमामत और विलायत की रक्षा, सत्य बोलने, धैर्य, दृढ़ता और सत्य के मार्ग में त्याग एवं बलिदान के उनके आदर्श को अपने जीवन के लिए मार्गदर्शक बनाना चाहिए।

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