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सच्चे ईमान का परिचय इंसान के चरित्र और कर्मों से मिलता है

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सच्चे ईमान का परिचय इंसान के चरित्र और कर्मों से मिलता है

अंजुमन-ए-शरई शियान जम्मू-कश्मीर के अध्यक्ष हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन आगा सैयद हसन मौसवी सफ़वी ने केंद्रीय इमामबाड़ा बडगाम में जुमे का ख़ुत्बा देते हुए कहा कि ईमान केवल ज़बानी दावे का नाम नहीं है, बल्कि यह दिल से विश्वास, ज़बान से स्वीकार और व्यावहारिक आचरण का संगम है। उन्होंने हज़रत अबू तालिब (अ.) के ईमान और उनके स्थान के बारे में पैदा किए जाने वाले संदेहों को प्रामाणिक ऐतिहासिक रिवायतों और शैक्षणिक प्रमाणों की रोशनी में दूर करने पर भी ज़ोर दिया।

अंजुमन-ए-शरई शियान जम्मू-कश्मीर के अध्यक्ष हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन आगा सैयद हसन मौसवी सफ़वी ने केंद्रीय इमामबाड़ा बडगाम में जुमे के ख़ुत्बे के दौरान ईमान की वास्तविकता और उसकी व्यावहारिक आवश्यकताओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि ईमान केवल ज़बानी दावा या स्वीकारोक्ति नहीं है, बल्कि यह दिल से विश्वास, ज़बान से स्वीकार और व्यावहारिक आचरण का एक व्यापक स्वरूप है। इसका प्रतिबिंब इंसान के विश्वास, नैतिकता और रोज़मर्रा की ज़िंदगी के सभी पहलुओं में दिखाई देना चाहिए।

सच्चे ईमान का परिचय इंसान के चरित्र और कर्मों से मिलता है: आगा सैयद हसन मौसवी सफ़वी

इमाम मूसा काज़िम (अ.) की एक अर्थपूर्ण हदीस का हवाला देते हुए आगा हसन ने स्पष्ट किया कि ईमान के तीन बुनियादी पहलू हैं—दिल से पुष्टि, ज़बान से स्वीकार और शरीर के अंगों के माध्यम से उसका व्यावहारिक प्रदर्शन। उन्होंने कहा कि सच्चा मोमिन वही है, जिसका ईमान उसके चरित्र और व्यवहार से स्पष्ट हो। केवल ईमान का दावा कर लेने से इंसान उसकी वास्तविक ज़िम्मेदारियों से मुक्त नहीं हो जाता, बल्कि इसके लिए आवश्यक है कि वह अपनी पूरी ज़िंदगी को अल्लाह के आदेशों के अधीन करे।

उन्होंने आगे कहा कि इंसान के शरीर का प्रत्येक अंग अपने स्थान पर एक ज़िम्मेदारी और अमानत है। आँख, कान, ज़बान, हाथ, पैर और शरीर के अन्य अंगों को उन्हीं सीमाओं के भीतर इस्तेमाल करना आवश्यक है, जिन्हें अल्लाह तआला ने निर्धारित किया है। ज़बान और निगाह से लेकर शरीर की अन्य क्षमताओं तक, हर चीज़ के इस्तेमाल में तक़वा, पवित्रता और धार्मिक सीमाओं का पालन अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईमान के भी विभिन्न दर्जे और स्तर होते हैं। इंसान का आध्यात्मिक स्थान उसके दावों से नहीं, बल्कि उसके विश्वास की मज़बूती, कर्मों की पवित्रता और व्यावहारिक प्रतिबद्धता से निर्धारित होता है।

सच्चे ईमान का परिचय इंसान के चरित्र और कर्मों से मिलता है: आगा सैयद हसन मौसवी सफ़वी

जुमे के ख़ुत्बे के दौरान आगा हसन ने हज़रत अबू तालिब (अ.) के व्यक्तित्व, ईमान और स्थान-प्रतिष्ठा के बारे में भी चर्चा की। उन्होंने उनके ईमान के संबंध में संदेह पैदा करने के प्रयासों को खारिज किया। उन्होंने अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली इब्ने अबी तालिब (अ.) से संबंधित ऐतिहासिक रिवायतों का हवाला देते हुए पैग़म्बरे इस्लाम (स.) के वंश की पवित्रता और उसके तौहीद से जुड़े होने को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हज़रत अबू तालिब (अ.) के महान व्यक्तित्व और उनके स्थान को ऐतिहासिक तथ्यों, प्रामाणिक रिवायतों तथा शैक्षणिक एवं शोधपरक प्रमाणों की रोशनी में समझने की आवश्यकता है, न कि निराधार आरोपों और गलतफहमियों के आधार पर उनके बारे में कोई राय बनाई जाए।

उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि हज़रत अबू तालिब (अ.) के पवित्र जीवन, धार्मिक सेवाओं और उनके स्थान एवं प्रतिष्ठा से जुड़े विषयों पर गंभीर शैक्षणिक और शोधपरक दृष्टिकोण के साथ चर्चा की जानी चाहिए, ताकि ऐतिहासिक तथ्यों को सही परिप्रेक्ष्य में समझा जा सके।

सच्चे ईमान का परिचय इंसान के चरित्र और कर्मों से मिलता है: आगा सैयद हसन मौसवी सफ़वी

अपने संबोधन के अंत में आगा हसन ने मोमिनों को नसीहत की कि वे अपने विश्वास और कर्मों में दृढ़ता पैदा करें, अहलेबैत (अ.) की शिक्षाओं पर अडिग रहें, अपनी व्यक्तिगत और सामाजिक ज़िंदगी में धार्मिक ज़िम्मेदारियों को प्राथमिकता दें तथा समाज में एकता, भाईचारे और आपसी सहयोग को बढ़ावा दें।

जुमे के ख़ुत्बे का समापन उम्मते मुस्लिम के गौरव, एकता और स्थिरता, अहलेबैत (अ.) के स्थान एवं प्रतिष्ठा की बुलंदी, मोमिनों की सफलता तथा जारी धार्मिक और सामाजिक योजनाओं की पूर्ति के लिए विशेष दुआओं के साथ हुआ।

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