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दुश्मन की किसी भी ग़लती का मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा: आयतुल्लाह ख़ातमी

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दुश्मन की किसी भी ग़लती का मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा: आयतुल्लाह ख़ातमी

तेहरान के इमामे जुमा आयतुल्लाह सैयद अहमद ख़ातमी ने कहा कि ईरान के सशस्त्र बल, जिनमें सेना, इस्लामी क्रांति रक्षक बल (सिपाह), बसीज और पुलिस शामिल हैं, अल्लाह पर ईमान और भरोसे के साथ हर तरह के ख़तरे का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं। यदि दुश्मन ने ज़रा-सी भी ग़लती की तो उसे कड़ा जवाब दिया जाएगा।

आयतुल्लाह सैयद अहमद ख़ातमी ने नमाज़े जुमा के ख़ुत्बों में कहा कि अल्लाह पर भरोसा करना हक़ के मोर्चे की सबसे बड़ी ताक़त है। हज़रत मूसा (अ.) ने फ़िरऔन के मुक़ाबले में अपनी क़ौम को अल्लाह पर भरोसा रखने की नसीहत की थी। इसी तरह हज़रत हूद (अ.) और पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स.) ने भी दुश्मनों के मुक़ाबले में अल्लाह पर विश्वास और भरोसा रखने की शिक्षा दी।

उन्होंने कहा कि इस्लामी क्रांति की सफलता और पिछले 47 वर्षों के दौरान उसकी प्रगति में भी अल्लाह पर भरोसे की अहम भूमिका रही है। उन्होंने मीडिया और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों से अपील की कि वे समाज में अल्लाह पर भरोसे और उसके वादों पर विश्वास की भावना को मज़बूत बनाने में अपना योगदान दें।

तेहरान के इमामे जुमा ने जंगे उहुद के बाद पेश आने वाली घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि ग़ज़वा-ए-हमराउल-असद में घायल होने के बावजूद मुसलमानों ने रसूले ख़ुदा (स.) के आदेश पर मैदान में हाज़िरी दी। उनके दृढ़ ईमान और हौसले को देखकर अबू सुफ़ियान ने दोबारा मुक़ाबला करने से पीछे हटने का फ़ैसला किया। उन्होंने कहा कि आज ईरानी सशस्त्र बलों के जवान भी उसी ईमान, जज़्बे और संकल्प के साथ देश की रक्षा के लिए तैयार हैं।

अमेरिका-विरोधी रैलियाँ और राजनीतिक नाकामियाँ

आयतुल्लाह सैयद अहमद ख़ातमी ने 13 आबान को ईरान के 900 शहरों में आयोजित रैलियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अवसर पर लोगों ने अमेरिका-विरोधी नारे लगाए। उनके अनुसार, अमेरिका के ख़िलाफ़ ईरानी क़ौम का यह रुख़ धार्मिक और क़ुरआनी शिक्षाओं पर आधारित है, क्योंकि क़ुरआन ज़ुल्म, फ़साद और झूठ का विरोध करता है।

उन्होंने अमेरिका और ज़ायोनी शासन की राजनीतिक परिस्थितियों का ज़िक्र करते हुए कहा कि नेतन्याहू हालिया चुनावों में दोबारा सरकार बनाने के लिए अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सके। इसी तरह अमेरिकी चुनावों के नतीजे भी रिपब्लिकन पार्टी के लिए नाकामी का कारण बने। उन्होंने दावा किया कि चुनाव में हिस्सा लेने वाले 74 प्रतिशत मतदाताओं ने ईरान पर हमले और युद्ध का विरोध किया था।

विलायते फ़क़ीह इस्लामी क्रांति की सफलताओं का केंद्र

तेहरान के इमामे जुमा ने विलायते फ़क़ीह को इस्लामी क्रांति की सफलताओं का एक अहम कारण बताते हुए कहा कि इमाम ख़ुमैनी (रह.) हमेशा विलायते फ़क़ीह के समर्थन पर ज़ोर देते थे और आज भी इस सिद्धांत की रक्षा करना ज़रूरी है।

उन्होंने कहा कि दुश्मनों के मुक़ाबले में देश की ताक़त बढ़ाना और हर तरह के दबाव के सामने डटे रहना ही प्रभावी रक्षा रणनीति है। दुश्मन के सामने झुकने से उसका हौसला बढ़ेगा और वह आगे और माँगें करेगा। इसलिए ज़रूरी है कि ईरान अपनी राष्ट्रीय शक्ति और रक्षा क्षमताओं को और मज़बूत बनाए।

अपने ख़िताब के अंत में उन्होंने कहा कि अमेरिका के मुक़ाबले में इस्लामी क्रांति की सफलताओं में विलायते फ़क़ीह की बुनियादी भूमिका रही है और मौजूदा नेतृत्व भी इमाम ख़ुमैनी (रह.) के रास्ते को आगे बढ़ा रहा है।

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