इस्लाम में कोई जाति और नस्ल से बड़ा नहीं होता

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इस्लाम में कोई जाति और नस्ल से बड़ा नहीं होता

हमारा विश्वास है कि सारे ईश्वरीय दूत  विशेषकर  पैग़म्बरे इस्लाम (स) ने किसी भी “नस्ली” या “क़ौमी” या जातीय उच्चता को क़बूल नही किया। इन की नज़र में दुनिया के तमाम इँसान बराबर थे चाहे वह किसी भी ज़बान,नस्ल या क़ौम से ताल्लुक़ रखते हों।

क़ुरआन तमाम इंसानों को संबोधित करते हुए कहता है कि

يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّا خَلَقْنَاكُم مِّن ذَكَرٍ‌ وَأُنثَىٰ وَجَعَلْنَاكُمْ شُعُوبًا وَقَبَائِلَ لِتَعَارَ‌فُوا  إِنَّ أَكْرَ‌مَكُمْ عِندَ اللَّـهِ أَتْقَاكُمْ

“या अय्युहा अन्नासु इन्ना ख़लक़ना कुम मिन ज़करिन व उनसा व जअलना कुम शुउबन व क़बाइला लितअरफ़ू इन्ना अकरमा कुम इन्दा अल्लाहि अतक़ा कुम (सूरए हुजरात आयत 13)

यानी ऐ इँसानों हम ने तुम को एक मर्द और औरत से पैदा किया फिर हम ने तुम को क़बीलों में बाँट दिया ताकि तुम एक दूसरे को पहचानो (लेकिन यह बरतरी और उच्चता का आधार नही है) तुम में अल्लाह के नज़दीक वह मोहतरम है जो तक़वे में ज़्यादा है।

पैग़म्बरे इस्लाम (स)की एक बहुत मशहूर हदीस है जो आप ने हज के दौरान  मिना की धरती पर ऊँट पर सवार हो कर लोगों की तरफ़ रुख़ कर के इरशाद फ़रमाई थीः

يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّ رَبَّكُمْ وَاحِدٌ , وَإِنَّ أَبَاكُمْ وَاحِدٌ , أَلا لا فَضْلَ لِعَرَبِيٍّ عَلَى أَعْجَمِيٍّ ، وَلا لِعَجَمِيٍّ عَلَى عَرَبِيٍّ , وَلا أَسْوَدَ عَلَى أَحْمَرَ , وَلا أَحْمَرَ عَلَى أَسْوَدَ إِلا بِتَقْوَى اللَّهِ , أَلا هَلْ بَلَّغْتُ ؟ " , قَالُوا : بَلَّغَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ، قَالَ : " فَلْيُبَلِّغِ الشَّاهِدُ الْغَائِبَ

“या अय्युहा अन्नासि अला इन्ना रब्बा कुम वाहिदिन व इन्ना अबा कुम वाहिदिन अला ला फ़ज़ला लिअर्बियिन अला अजमियिन ,व ला लिअजमियिन अला अर्बियिन ,व ला लिअसवदिन अला अहमरिन ,व ला लिअहमरिन अला असवदिन ,इल्ला बित्तक़वा ,अला हल बल्लग़तु ? क़ालू नअम ! क़ाला लियुबल्लिग़ अश्शाहिदु अलग़ाइबा ”

यानी ऐ लोगो जान लो कि तुम्हारा ख़ुदा एक है और तुम्हारे माँ बाप भी एक हैं,ना अर्बों को अजमियों पर बरतरी हासिल है न अजमियों को अर्बों पर, गोरों को कालों पर बरतरी है और न कालों को गोरों पर अगर किसी को किसी पर बरतरी है तो वह तक़वे के एतबार से है।

फिर आप ने सवाल किया कि क्या मैं ने अल्लाह के हुक्म को पहुँचा दिया है? सब ने कहा कि जी हाँ आप ने अल्लाह के हुक्म को पहुँचा दिया है। फिर आप ने फ़रमाया कि जो लोग यहाँ पर मौजूद है वह इस बात को उन लोगों तक भी पहुँचा दें जो यहाँ पर मौजूद नही है।

 

 

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