इमाम ख़ुमैनी: इस्लामी इतिहास का एक महान अध्याय

Rate this item
(0 votes)
इमाम ख़ुमैनी: इस्लामी इतिहास का एक महान अध्याय

अहले बैत फ़ाउंडेशन के उपाध्यक्ष हुज्जतुल इस्लाम मौलाना तकी अब्बास रिज़वी कलकत्तवि  ने कहा कि: इमाम ख़ुमैनी इस्लामी इतिहास के एक महान अध्याय और एक ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने अपने समय के तंत्र को चुनौती दी और एक नए युग की शुरुआत की। उनकी नेतृत्व में ईरान ने एक ऐसा क्रांति देखा जिसने न केवल ईरान बल्कि सम्पूर्ण इस्लामिक दुनिया को प्रभावित किया। इमाम ख़ुमैनी का संदेश केवल राजनीतिक नहीं था, बल्कि यह एक बौद्धिक और आध्यात्मिक क्रांति थी जिसने इस्लामी समाज की नींव को मजबूत किया।

 हुज्जतुल इस्लाम मौलाना तकी अब्बास रिज़वी कलकत्तवि  ने कहा: इमाम ख़ुमैनी की रणनीति, संघर्ष और उनके विचारों ने ईरानी कौम को एक नई पहचान दी। उनकी नेतृत्व में ईरानी जनता ने उपनिवेशवादी ताकतों के खिलाफ आवाज उठाई और एक मजबूत, आत्मनिर्भर इस्लामी राज्य की स्थापना की। इमाम ख़ुमैनी की सरलता, संकल्प और समझदारी ने दुनिया भर के मुसलमानों को एक नया हौंसला दिया और यह साबित किया कि अगर इरादा मजबूत हो तो किसी भी शक्तिशाली दुश्मन का सामना किया जा सकता है।

अहले बैत फ़ाउंडेशन के उपाध्यक्ष ने कहा कि: उनके विचार न केवल ईरान के लिए, बल्कि पूरी इस्लामी दुनिया के लिए एक मार्गदर्शन बन गए। इमाम ख़ुमैनी ने इस्लाम के आध्यात्मिक और राजनीतिक संदेश को इस तरह पेश किया कि वह दुनिया भर के मुसलमानों के लिए एक आदर्श बन गए। उनकी संघर्ष ने एक नई आंदोलन को जन्म दिया जिससे न केवल ईरान, बल्कि सम्पूर्ण मुस्लिम उम्मा को जागरूकता का एहसास हुआ।

उन्होने कहा कि: इमाम ख़ुमैनी की नेतृत्व ने एक ऐसा क्रांति लाया जिसने ईरान को केवल एक भौगोलिक राज्य नहीं बल्कि एक मजबूत इस्लामी राज्य में बदल दिया, जिसकी अपनी अलग पहचान, आत्मनिर्भरता और संस्कृति थी। आज भी इमाम ख़ुमैनी का सिद्धांत और उनकी मार्गदर्शन मुसलमानों के दिलों में जीवित है और उनके प्रभाव आज भी वैश्विक स्तर पर महसूस किए जा रहे हैं। अगर यह कहा जाए कि आज ईरान वैश्विक स्तर पर विकास, स्थिरता और मध्य पूर्व में एक अजेय शक्ति के रूप में उभर रहा है, तो यह कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। इस सफलता के पीछे इमाम ख़ुमैनी की मार्गदर्शन और उनके साथ शहीद होने वाले महान शहीदों की बलिदानें हैं, जिन्होंने अपने खून से क्रांति की सफलता की राहें खोलीं। ये बलिदान न केवल ईरान के भविष्य को बदलने का कारण बने, बल्कि सम्पूर्ण इस्लामी दुनिया के लिए एक नई उम्मीद और हौंसला भी प्रदान किया।

हुज्जतुल इस्लाम मौलाना तकी अब्बास रिज़वी कलकत्तवि  ने कहा कि: २२ बहमन के इस महान अवसर पर हम इमाम ख़ुमैनी के साथ-साथ सभी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और रहबर मौज़मؒ और उनके अनुयायियों को दिल की गहराइयों से शुभकामनाएँ प्रस्तुत करते हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि इस्लामी क्रांति की सफलता में उन महान जानों के बलिदान शामिल हैं जिन्होंने स्वतंत्रता, आत्मनिर्भरता और इस्लामी सिद्धांतों की पुनर्स्थापना के लिए अपनी जानें दीं।

Read 1 times