दुश्मन के मुक़ाबले में निवारक शक्ति को बाक़ी रखने की ज़रूरत

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दुश्मन के मुक़ाबले में निवारक शक्ति को बाक़ी रखने की ज़रूरत

इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई ने रविवार को ईरान के सशस्त्र बल के कमान्डरों के एक गुट से मुलाक़ात में शक्ति, सुरक्षा, सम्मान और निर्धारत समय में पर्याप्त क्षमता की प्राप्ति को सशस्त्र बल के मुख्य लक्ष्य गिनवाए।

उन्होंने इस्लामी व्यवस्था पर दुश्मन के अभूतपूर्व हमले का कारण इस व्यवस्था का दिन प्रतिदिन शक्तिशाली होना बताया क्योंकि दुश्मन इस बढ़ती ताक़त से ख़तरा महसूस कर रहा है।

इस्लामी गणतंत्र क्षेत्र में तनाव व सैन्य टकराव नहीं चाहता लेकिन उसने दुश्मनों व अतिक्रमणकारियों को यह दर्शा दिया है कि जब भी जहां भी ज़रूरी होगा वह सुरक्षा को नुक़सान पहुंचाने वाले तत्वों का मुक़ाबला करेगा और अपनी रक्षा व निवारक शक्ति बढ़ाने के लिए उसे किसी की इजाज़त लेने की ज़रूरत नहीं है।

इस्लामी गणतंत्र ख़तरों के मुक़ाबले में निवारक शक्ति को बनाए रखने के पीछे दो उद्देश्य रखता है।

पहला उद्देश्यः ज़रूरी क्षेत्रों में रक्षा उद्योग का स्वदेशी होना ख़ास तौर पर मीज़ाईल रक्षा के क्षेत्र में, क्योंकि जब निवारक शक्ति की बात होती है तो यह रणनैतिक हैसियत रखती है।

दूसरा उद्देश्यः इस दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ने के लिए विशेषज्ञ बल को ट्रेनिंग देने, ट्रेनिंग के लिए आधुनिक तंत्र को इस्तेमाल करने और ज़रूरी प्रोत्साहन देने पर आधारित है।  

 

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