यह अज़ीम और बा बरकत इंक़ेलाब, इस्लाम और तमाम मुसलमानों के लिए है

Rate this item
(0 votes)
यह अज़ीम और बा बरकत इंक़ेलाब, इस्लाम और तमाम मुसलमानों के लिए है

प्रमुख शेख़ ग़ाज़ी हुनीना ने इंक़िलाब-ए-इस्लामी ईरान की इस्लामी माहियत और उसके आलमी मक़ासिद पर ज़ोर देते हुए उसे पूरी उम्मत-ए-इस्लामी के लिए एक अहम मोड़ क़रार दिया है।

तजम्मोअ उलेमा-ए-मुस्लिमीन लेबनान के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ के शेख ग़ाज़ी हुनीना ने इंक़िलाब-ए-इस्लामी ईरान की कामयाबी की 47वीं सालगिरह के मौक़े पर अपने एक वीडियो पैग़ाम में इस इंक़िलाब की आलमी हैसियत और उम्मत पर मबनी मक़ासिद को बयान किया हैं।

उनके पैग़ाम का मज़मून इस तरह है:

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

ईरान में इंक़िलाब-ए-इस्लामी की कामयाबी के फ़ौरन बाद जब उसे इस्लामी उनवान के साथ पेश किया गया और मुल्क का नाम “जम्हूरिया-ए-इस्लामी ईरान” रखा गया, तो यह खुद इस बात की साफ़ दलील है कि इमाम रूहुल्लाह ख़ुमैनी (रह.) की क़ियादत में आने वाला यह अज़ीम और बा बरकत इंक़िलाब इस्लाम और मुसलमानों के लिए है।

उन्होंने कहा कि यही बात ईरान के संविधान में भी साफ़ तौर पर बयान की गई है, जिसमें फ़िलिस्तीन की हिमायत, मज़लूमों की मदद और वहदत (एकता) पर मबनी सोच पर ज़ोर दिया गया है।

यह तमाम बातें इस हक़ीक़त को मज़बूत करती हैं कि 22 बहमन (11 फ़रवरी) को कामयाब होने वाला यह इंक़िलाब सिर्फ़ ईरान तक महदूद नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के इस्लामी मुल्कों और तमाम मज़लूम क़ौमों के लिए एक इस्लामी इंक़िलाब है।

Read 73 times