22 बहमन की रैली में लोगों की ऐतिहासिक भागीदारी पर आयतुल्लाह आराफी का शुक्रिया

Rate this item
(0 votes)
22 बहमन की रैली में लोगों की ऐतिहासिक भागीदारी पर आयतुल्लाह आराफी का शुक्रिया

हौज़ा ए इल्मिया ईरान के प्रमुख आयतुल्लाह अली रज़ा आराफ़ी ने 22 बहमन 1404 की अज़ीम-ओ-शान रैली में मिल्लत-ए-ईरान की भरपूर और मुत्तहिद शिरकत पर ख़िराज-ए-तहसीन पेश करते हुए कहा है कि अवाम की यह वहदत-आफ़रीन मौजूदगी और क़ौमी जश्न हम सब, बिलख़ुसूस ज़िम्मेदारान की ज़िम्मेदारियों को दोगुना और निहायत संगीन बना देता है।

हौज़ा ए इल्मिया ईरान के प्रमुख आयतुल्लाह अली रज़ा आराफ़ी ने 22 बहमन की रैली ने ईरान, इस्लाम और इस्लामी क्रांति के इतिहास में एक अद्भुत और गौरवपूर्ण दृश्य प्रस्तुत किया। इस महान जनसमूह ने स्वतंत्रता, आज़ादी और इस्लामी गणतंत्र के झंडे को और ऊँचा किया और वैश्विक अहंकार, उपनिवेशवाद और अत्याचार के खिलाफ जारी प्रतिरोध आंदोलन को नई शक्ति प्रदान की।

उन्होंने कहा कि हम ईश्वर के दरबार में सजदा-ए-शुक्र अदा करते हैं और जागरूक एवं साहसी ईरानी राष्ट्र, विशेषकर जागृति और परिवर्तन के इच्छुक युवा पीढ़ी को दिल की गहराइयों से सलाम करते हैं। गाँवों से लेकर बड़े शहरों तक, विशेष रूप से तेहरान और क़ुम में लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी प्रशंसनीय और सराहनीय है।

आयतुल्लाह आराफ़ी ने जोर देकर कहा कि इस्लाम, ईरान और इस्लामी व्यवस्था की यह महानता देश के दुश्मनों को पीछे हटने पर मजबूर कर देगी और दुनिया भर के मज़लूमों, न्यायप्रियों एवं सत्य के अन्वेषकों के साहस को और अधिक मज़बूती प्रदान करेगी। इसके परिणामस्वरूप वैश्विक स्तर पर ईरान और उसकी महान राष्ट्र की स्थिति और अधिक सुदृढ़ होगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस शानदार और एकतापूर्ण जनउपस्थिति के बाद राज्य संस्थाओं, प्रशासन, न्यायपालिका और सांस्कृतिक एवं प्रचार केंद्रों की ज़िम्मेदारियाँ बढ़ जाती हैं। यह आवश्यक है कि दुनिया और समाज को बेहतर ढंग से समझा जाए, विशेषकर नई पीढ़ी के साथ बौद्धिक और हार्दिक संबंध को मजबूत किया जाए, और इस्लामी क्रांति की उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से उजागर किया जाए। इसी प्रकार इस्लामी सभ्यतागत विचार की नींव और अहंकार के मुकाबले उसके मोर्चों को स्पष्ट करना भी समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि ईरानी राष्ट्र का स्पष्ट संदेश यह है कि वह इस्लाम, इस्लामी क्रांति और शहीदों के उच्च उद्देश्यों पर अटल है तथा रहबर-ए-मोअज्जम (सर्वोच्च नेता) के नेतृत्व का अनुसरण जारी रखे हुए है। लोगों की यह भागीदारी इस बात की माँग करती है कि जिम्मेदार लोग जनता की आर्थिक और सांस्कृतिक समस्याओं के समाधान के लिए दोगुनी मेहनत करें।

आयतुल्लाह आराफ़ी ने आशा व्यक्त की कि सरकार और संबंधित संस्थाएँ नई रणनीति अपनाएँगी और लोगों की समस्याओं के समाधान तथा देश के विकास के लिए नए रास्ते तलाशेंगी।

उन्होंने अपने संदेश के अंत में हज़रत वली अस्र (अ.ज.फ.अ.), शहीदों और ईरानी राष्ट्र को सलाम प्रेषित किया।

Read 3 times