निराशा और फूट पैदा करना इस्लामी इतिहास का सबसे बड़ा गुनाह है।हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन ग़फूरी

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निराशा और फूट पैदा करना इस्लामी इतिहास का सबसे बड़ा गुनाह है।हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन ग़फूरी

हुज्जतुल इस्लाम वल-मुस्लिमीन ग़फूरी ने कल रात टेलीविजन कार्यक्रम में वर्तमान परिस्थितियों में भय, फूट और निराशा पैदा करने को इस्लामी इतिहास का सबसे बड़ा पाप बताया और इसे पैग़म्बरे इस्लाम (स.ल.) की सीरत के विपरीत बताया।

करमानशाह के इमाम ए जुमा ने हज़रत अली (अ.स.) के कथन का उल्लेख करते हुए चेतावनी दी कि जो व्यक्ति जानबूझकर या अनजाने में राष्ट्रीय एकता और एकजुटता को नुकसान पहुंचाता है, वह वास्तव में दुश्मन के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह ऐसा पाप है जिसका कोई विकल्प स्वयं इज़राइल भी नहीं जानता।

उन्होंने आगे इमाम ख़ुमैनी (र.ह.) के करमानशाह प्रांत के प्रति विशेष दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रांत में इमाम ख़ुमैनी (र.ह.) द्वारा की गई नियुक्तियां करमानशाह के प्रति उनकी विशेष कृपा को दर्शाती हैं।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1390 (ईरानी कैलेंडर) में इमाम ख़ुमैनी (र.ह.) की इस प्रांत की यात्रा के दौरान दिए गए वक्तव्य आज एक ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में मौजूद हैं, जिनमें उन्होंने करमानशाह की महानता और विशेष स्थान पर जोर दिया था।

करमानशाह में वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि ने आगे कहा कि रहबरे मोअज़्ज़म इंक़ेलाब भी इमाम ख़ुमैनी (र.ह.) की तरह इस प्रांत पर विशेष ध्यान देते हैं। उन्होंने बताया कि करमानशाह में नियुक्ति के बाद अपनी पहली मुलाकात में उन्होंने प्रांत की समस्याओं के संबंध में रिपोर्ट पेश की थी, जिसे सुनने के बाद रहबरे मोअज़्ज़म ने उठाए गए मुद्दों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था।

उन्होने अंत में कहा कि रहबरे मोअज़्ज़म इंक़ेलाब ने इमाम ख़ुमैनी (र.ह.) के साथ बिताए 37 वर्षों के बहुमूल्य अनुभव के आधार पर उनकी राह को आगे बढ़ाया है और उनमें विशेष एवं उल्लेखनीय विशेषताएं हैं। उन्होंने समाज में निराशा फैलाने और दरार पैदा करने की दुश्मनों की साजिशों के सामने सतर्क रहने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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