भारत के मुबारकपुर स्थित मदरसा बाबुल इल्म में शहीद रहबर-ए-मुअज़्ज़म, उनके परिवार और राह-ए-इस्तेक़ामत व मुक़ावमत के अन्य शहीदों की याद में चालीसवें दिन की मजलिस आयोजित हुई, जिसमें मदरसे के शिक्षकों और छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
मजलिस-ए-अज़ा को संबोधित करते हुए मदरसा बाबुल इल्म मुबारकपुर के प्रिंसिपल हुज्जतुल इस्लाम मौलाना मज़ाहिर हुसैन ने कहा कि शहीद रहबर-ए-मुअज़्ज़म हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली हुसैनी ख़ामेनेई, नूरुल्लाह मरक़दह, का पूरा जीवन इस्लामी शिक्षाओं और इस्लामी क्रांति से जुड़ा हुआ था। युवावस्था से लेकर अपने अत्यंत पवित्र, सरल और पारदर्शी जीवन के अंतिम क्षणों तक उन्होंने कलम और कागज़, अपनी ज़बान और बयान तथा दिल और जान से इस्लामी शिक्षाओं की व्याख्या, उम्मत की एकता और इस्लामी गणराज्य ईरान के नेतृत्व के लिए प्रयास किया। निस्संदेह उन्होंने इस्लामी शासन व्यवस्था का एक अत्यंत सफल और सुनहरा अध्याय लिखा, जो हमेशा दुनिया के सभी धार्मिक और राजनीतिक लोगों को विचार और कार्य करने का निमंत्रण देता रहेगा। वह इस्लामी दुनिया के महानतम और प्रतिष्ठित धार्मिक एवं राजनीतिक नेता और मार्गदर्शक थे तथा शिया जगत के महानतम विद्वान, मरजा-ए-तक़लीद और गौरव का स्रोत थे।
उन्होंने आगे कहा कि हज़रत शहीद रहबर आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली हुसैनी ख़ामेनेई, आला अल्लाह मक़ामहू, का त्याग, उनका तक़वा, उनका ज्ञान, उनकी दूरदर्शिता, उनका चरित्र, उनकी बहादुरी, उनकी दृढ़ता, उनका प्रतिरोध और उनकी राजनीति, इतिहास के सुनहरे पन्नों की आकर्षक शोभा बनी हुई है। उनके अंतिम संस्कार में दुनिया भर से बिना किसी जाति और धर्म के भेदभाव के करोड़ों लोगों की भागीदारी ने न केवल यह साबित किया कि यह मानव इतिहास का दुनिया में सबसे बड़ा जनाज़ा था, बल्कि अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त आतंकवादी हमलों में शहीद होने वाले इस मुजाहिद और संघर्षशील व्यक्ति को इस सदी का सबसे बड़ा ईश्वर-भय रखने वाला इंसान भी साबित किया।
उन्होंने कहा कि ईश्वर की कृपा को देखिए कि जिस व्यक्ति को अमेरिका और इज़राइल ईरान से मिटाना चाहते थे, वह शहीद होने के बाद पूरे अरब, अजम और पूरी दुनिया में छा गया है। अफसोस की बात यह है कि आपकी शहादत से इस्लाम और मानवता की दुनिया में ऐसा खालीपन पैदा हो गया है, जिसे भरना बहुत कठिन है।
मौलाना मज़ाहिर हुसैन ने शहीद रहबर-ए-मुअज़्ज़म और अन्य सत्य के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने वर्तमान रहबर-ए-मुअज़्ज़म आयतुल्लाह सैयद मुजतबा हुसैनी ख़ामेनेई, ईरानी जनता और सरकार के प्रति संवेदना और शोक व्यक्त किया। साथ ही रहबर-ए-मुअज़्ज़म आयतुल्लाह मुजतबा हुसैनी ख़ामेनेई की स्वास्थ्य और सुरक्षा तथा इस्लामी गणराज्य ईरान की पूर्ण विजय और इमाम-ए-ज़माना अज्जलल्लाहु तआला फ़रजहुश्शरीफ़ के ज़ुहूर-ए-पुरनूर के लिए दुआ की।
कार्यक्रम की शुरुआत मदरसा बाबुल इल्म मुबारकपुर के शिक्षक हुज्जतुल इस्लाम मौलाना कर्रार हुसैन अज़हरी ने पवित्र कुरआन की तिलावत से की।













