लेबनान में प्रतिरोधी संसदीय ब्लॉक के प्रमुख ने कहा कि व्यापक राष्ट्रीय रक्षा रणनीति पर सहमति के लिए एक संप्रभु शक्ति का होना आवश्यक है और इस संबंध में हिज़्बुल्लाह की रेड लाइन में कोई बदलाव नहीं आया है।
लेबनानी संसद के सदस्य और प्रतिरोधी संसदीय ब्लॉक के प्रमुख मुहम्मद रअद ने कहा कि हथियारों को राज्य तक सीमित करने से जुड़ी किसी भी चर्चा को लेबनान के कब्जे वाले क्षेत्रों से ज़ायोनी शासन की वापसी, आक्रामकता की समाप्ति और लितानी नदी के दक्षिण में लेबनानी सेना की तैनाती से जोड़ा जाना चाहिए। यदि ये कदम उठाए जाते हैं तो व्यापक राष्ट्रीय रक्षा रणनीति पर सहमति का रास्ता खुल सकता है।
मुहम्मद रअद ने वेबसाइट ‘अल-मुदुन’ से बातचीत में ज़ायोनी शासन के साथ होने वाली वार्ताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वे ऐसे किसी भी समझौते का सकारात्मक रूप से स्वागत करने के लिए तैयार हैं, जो वापसी और दुश्मन की कार्रवाइयों को समाप्त करने की गारंटी देता हो। हालांकि, उनकी शर्त है कि यह समझौता अप्रत्यक्ष वार्ता के माध्यम से हो और दुश्मन को किसी प्रकार की रियायत न दी जाए।
उन्होंने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन से भी संविधान और राष्ट्रीय समझौते के दस्तावेज़ का पालन करने तथा राष्ट्रीय एकता की रक्षा पर ज़ोर देने का आग्रह किया।
विदेश नीति के संबंध में रअद ने इस्लामी गणराज्य ईरान के साथ संबंधों को मजबूत करने पर ज़ोर दिया और कहा कि ईरान इस बात पर ज़ोर दे रहा है कि लेबनान का मुद्दा इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के क्रियान्वयन में पहले बिंदु के रूप में शामिल किया जाए।
मुहम्मद रअद ने ज़ोर देकर कहा कि हिज़्बुल्लाह और अमल आंदोलन अपनी सबसे बेहतर स्थिति में हैं। इस्लामी प्रतिरोध ने बेहद संवेदनशील और जटिल परिस्थितियों में आक्रामकता का मुकाबला करते हुए एक महत्वपूर्ण प्रतिरोधी उपलब्धि हासिल की है।
उन्होंने आगे कहा कि कुछ लोगों को हिज़्बुल्लाह के हथियार डालने की उम्मीद थी और ज़ायोनी दुश्मन तथा उसके सहयोगियों का मानना था कि हिज़्बुल्लाह पराजित हो जाएगा। लेबनान की सत्ताधारी ताकत भी प्रतिरोध को रूपरेखा समझौते के उपायों को लागू करने की प्रक्रिया में शामिल करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन ये सभी अनुमान विफल हो गए।
रअद ने अली अल-ताहिर की पहाड़ियों में हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां से मिले सबक दुश्मन के खिलाफ लगातार संघर्ष की रणनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि इज़राइल इन कार्रवाइयों की जटिलताओं का अध्ययन करेगा।
चूंकि प्रतिरोध इन कार्रवाइयों के विवरण को दुश्मन और उसके सहयोगियों के सामने उजागर नहीं करना चाहता, इसलिए इस चरण में अस्पष्टता को प्राथमिकता दी गई है। भविष्य में अली अल-ताहिर की कार्रवाइयों में प्रतिरोध के जवानों की क्षमता और उनके कार्यों के साथ बेहतर समन्वय स्पष्ट होगा।
मुहम्मद रअद ने कहा कि जब दुश्मन की वापसी सुनिश्चित हो जाए, उसकी आक्रामकता रुक जाए और लेबनानी सेना लितानी नदी के दक्षिण में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 को लागू करने के लिए तैयार हो जाए, तो उसके बाद हथियारों को राज्य के पास सीमित करने और व्यापक राष्ट्रीय रक्षा रणनीति के तहत राष्ट्रीय रक्षा में प्रतिरोध की भूमिका पर बातचीत के लिए आवश्यक माहौल तैयार हो जाएगा।













