जम्मू में भव्य रहमत-ए-आलम सम्मेलन

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जम्मू में भव्य रहमत-ए-आलम सम्मेलन

शिया फेडरेशन जम्मू प्रांत, भारत के तत्वावधान में टाउन हॉल पुंछ में एक भव्य रहमत-ए-आलम सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें उलेमा और ज़ाकिरीन, बुद्धिजीवियों, सामाजिक एवं धार्मिक हस्तियों, सम्मानित नागरिकों, युवाओं और छात्रों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

 शिया फेडरेशन जम्मू प्रांत, भारत के तत्वावधान में टाउन हॉल पुंछ में एक भव्य रहमत-ए-आलम सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें उलेमा और ज़ाकिरीन, बुद्धिजीवियों, सामाजिक एवं धार्मिक हस्तियों, सम्मानित नागरिकों, युवाओं और छात्रों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

जम्मू में भव्य रहमत-ए-आलम सम्मेलन: सामाजिक जीवन में पैगंबर की सीरत के सार्वभौमिक संदेश को उजागर करना जरूरी

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य पैगंबर-ए-अकरम हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वआलेहि वसल्लम की पवित्र सीरत, उनके सार्वभौमिक संदेश-ए-रहमत, शांति, प्रेम, भाईचारे, सहिष्णुता और आपसी सम्मान को आम करना था।

कुरआन मजीद की आयत-ए-मुबारका وَمَا أَرْسَلْنَاكَ إِلَّا رَحْمَةً لِّلْعَالَمِينَ अर्थात "और हमने आपको तमाम संसारों के लिए रहमत बनाकर ही भेजा है।" को सम्मेलन का केंद्रीय संदेश बनाया गया।

सम्मेलन की एक प्रमुख विशेषता यह थी कि इसे किसी एक धर्म, संप्रदाय या वर्ग तक सीमित रखने के बजाय धर्म और समुदाय के भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता, शांति, प्रेम और आपसी सम्मान को बढ़ावा देने का माध्यम बनाया गया।

जम्मू में भव्य रहमत-ए-आलम सम्मेलन: सामाजिक जीवन में पैगंबर की सीरत के सार्वभौमिक संदेश को उजागर करना जरूरी

इस अवसर पर वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि आज की दुनिया युद्ध, नफरत, असहिष्णुता, अन्याय और विभिन्न प्रकार के मतभेदों का सामना कर रही है। ऐसे हालात में पैगंबर-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वआलेहि वसल्लम की सीरत के सार्वभौमिक संदेश-ए-रहमत को सामाजिक जीवन में उजागर करना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

वक्ताओं ने कहा कि पैगंबर-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वआलेहि वसल्लम की सीरत केवल इतिहास का विषय नहीं है, बल्कि शांति, न्याय, मानवता, भाईचारे, सहिष्णुता और आपसी सम्मान का व्यावहारिक घोषणापत्र है। आवश्यकता इस बात की है कि हम सीरत-ए-तय्यबा को अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में व्यावहारिक मार्गदर्शन का माध्यम बनाएं।

जम्मू में भव्य रहमत-ए-आलम सम्मेलन: सामाजिक जीवन में पैगंबर की सीरत के सार्वभौमिक संदेश को उजागर करना जरूरी

रहमत-ए-आलम सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण और सराहनीय पहलू NEET, UPSC और शिक्षा के अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता हासिल करने वाले छात्र-छात्राओं का प्रोत्साहन और सम्मान समारोह था।

छात्रों की सफलताओं की सराहना करते हुए इस बात पर जोर दिया गया कि युवा पीढ़ी को शिक्षा, शोध, मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसे सम्मान युवाओं का हौसला बढ़ाते हैं और उन्हें भविष्य में अधिक मेहनत तथा उल्लेखनीय सफलता हासिल करने के लिए प्रेरित करते हैं।

इस अवसर पर मौलाना सैयद करामत हुसैन शऊर जाफरी की पुस्तक "शहीद रहबर और इस्लामी एकता" का विमोचन भी किया गया।

इस अवसर पर पुस्तक के वैचारिक और शैक्षिक पहलुओं पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि इस पुस्तक में इस्लामी एकता, उम्मत की एकजुटता, वर्तमान दौर में मुसलमानों के आपसी संबंध, वैचारिक चेतना और सामूहिक समस्याओं जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई है।

पुस्तक में इस्लामी एकता को केवल एक नारे के रूप में नहीं, बल्कि एक वैचारिक, सामाजिक और व्यावहारिक आवश्यकता के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। फिलिस्तीन, कुद्स, उम्मत-ए-मुस्लिमा की आपसी एकता और मुस्लिम समाजों के सामने मौजूद वर्तमान दौर की चुनौतियों के संदर्भ में भी विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है।

जम्मू में भव्य रहमत-ए-आलम सम्मेलन: सामाजिक जीवन में पैगंबर की सीरत के सार्वभौमिक संदेश को उजागर करना जरूरी

सम्मेलन के समग्र संदेश में पैगंबर-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वआलेहि वसल्लम की सीरत, इस्लामी एकता, वैचारिक चेतना, शिक्षा, युवाओं का प्रोत्साहन और मानव भाईचारे को एक-दूसरे से जोड़ा गया।

वक्ताओं ने इस संकल्प को व्यक्त किया कि पुंछ की धरती से ऐसा सकारात्मक संदेश उठना चाहिए, जो धर्म और संप्रदाय के भेदभाव से ऊपर उठकर समाज में प्रेम, शांति, एकता, सहिष्णुता, शिक्षा और मानवता को बढ़ावा दे।

कार्यक्रम में शामिल उलेमा, बुद्धिजीवियों, सामाजिक एवं धार्मिक हस्तियों और आम लोगों ने शिया फेडरेशन जम्मू प्रांत के इस प्रयास की सराहना की और इस प्रकार की शैक्षिक, सामाजिक एवं ज्ञानवर्धक गतिविधियों को लगातार जारी रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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