यमन के एक प्रतिनिधिमंडल ने लेबनान के शिया इस्लामिक सुप्रीम काउंसिल के उपाध्यक्ष शेख अली अल-खतीब से मुलाकात कर उन्हें यमन के ग्रैंड मुफ्ती शेख़ शम्सुद्दीन शरफ़ुद्दीन का संदेश सौंपा, जिसमें पवित्र स्थलों के संबंध में सऊदी अरब के आरोपों का जवाब देने के लिए उलेमा से आह्वान किया गया है।
उम्मत के पवित्र स्थलों के संबंध में सऊदी अरब के बार-बार लगाए जा रहे आरोपों के प्रति यमन के रुख को स्पष्ट करने के प्रयासों के तहत एक यमनी प्रतिनिधिमंडल ने लेबनान की यात्रा के दौरान यमन के ग्रैंड मुफ्ती शेख शम्सुद्दीन शरफ़ुद्दीन का संदेश शिया इस्लामिक सुप्रीम काउंसिल के उपाध्यक्ष शेख अली अल-खतीब को सौंपा।
संदेश में उनसे यमनी उलेमा के बयान से अवगत होने तथा मक्का मुकर्रमा और पवित्र स्थलों को निशाना बनाए जाने संबंधी सऊदी अरब के दावों के संबंध में यमन के वास्तविक रुख को सामने लाने और स्पष्ट करने में सहयोग करने का अनुरोध किया गया है।
पत्र में उम्मत के उलेमा से भी अपील की गई है कि वे इन भ्रामक दावों का खंडन करने और इस्लामी दुनिया के लोगों के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में अपनी भूमिका निभाएं।
दूसरी ओर, प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी में शेख अली अल-खतीब ने कहा कि यमन में जो कुछ हो रहा है, उससे हम दुखी हैं। यमन में युद्ध को 11 साल से अधिक समय हो चुका है, जबकि यमनी जनता पर घेराबंदी लागू है और संघर्ष जारी है, जिसमें लोग शहीद हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह संघर्ष ‘इज़राइली’ दुश्मन और उम्मत के दुश्मनों के खिलाफ होना चाहिए था, न कि स्वयं उम्मत के लोगों के बीच।
शेख अल-खतीब ने उम्मीद जताई कि तमाम क्षमताओं और ऊर्जा को मुख्य मुद्दे यानी फिलिस्तीन के मुद्दे तथा उस अहंकारी ‘इज़राइली’ दुश्मन के मुकाबले पर केंद्रित किया जाएगा, जो अरबों और मुसलमानों के लिए खतरा बना हुआ है।













