अहले-बैत (अ) की शिक्षाओं को सरल और प्रभावशाली अंदाज़ में पेश किया जाएः

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अहले-बैत (अ) की शिक्षाओं को सरल और प्रभावशाली अंदाज़ में पेश किया जाएः

आयतुल्लाह महमूद रजब़ी ने कहा कि इस्लाम और अहले-बैत अ.स.की शिक्षाएँ इंसानी बुद्धि और प्रकृति के अनुरूप हैं। यही वजह है कि दुनिया भर के लोगों को इन शिक्षाओं की ओर आकर्षित करने की व्यापक क्षमता मौजूद है। धार्मिक शिक्षाओं को प्रभावी ढंग से पेश करने के लिए ज़रूरी है कि उन्हें आज की भाषा और उपयुक्त अंदाज़ में लोगों तक पहुँचाया जाए।

आयतुल्लाह महमूद रजब़ी ने क़ुम में सांस्कृतिक एवं इस्लामी संबंध संगठन के प्रतिनिधियों और शहीद सद्र अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजकों से मुलाक़ात के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्लामी शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार के महत्व पर चर्चा की।

उन्होंने कहा कि विदेशों में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की सफलता काफी हद तक योग्य और अनुभवी लोगों पर निर्भर करती है। ऐसे लोग, जो इस्लामी शिक्षाओं के साथ-साथ दूसरे देशों की संस्कृति से भी परिचित हों, इस्लाम और इस्लामी क्रांति का संदेश बेहतर ढंग से पहुँचा सकते हैं। इसके विपरीत, प्रशिक्षित न होने वाले लोगों की वजह से अच्छे अवसर भी हाथ से निकल सकते हैं।

आयतुल्लाह रजब़ी ने विदेशों में सांस्कृतिक प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण पर ज़ोर देते हुए कहा कि उनके लिए नियमित शैक्षिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। उनके अनुसार, संबंधित देशों के हालात और सांस्कृतिक आवश्यकताओं का पहले से अध्ययन करना ज़रूरी है, ताकि प्रचार-प्रसार की गतिविधियों को बेहतर योजना के साथ अंजाम दिया जा सके।

उन्होंने कहा कि केवल किताबें और अन्य शैक्षिक सामग्री तैयार कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वास्तविक सफलता तब मिलती है, जब उनका संदेश लोगों के दिलों और दिमाग़ तक पहुँचे। इसलिए बड़ी संख्या में कमज़ोर किताबें प्रकाशित करने के बजाय कम संख्या में उच्च गुणवत्ता वाली, मज़बूत और प्रामाणिक किताबें तैयार करना अधिक उपयोगी है।

आयतुल्लाह रजब़ी ने अल्लामा मिस्बाह यज़्दी (रह.) की उस योजना का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य इस्लाम और मक्तब-ए-अहले-बैत (अ.स.) की शिक्षाओं को विभिन्न वर्गों और धर्मों के लोगों के लिए उपयुक्त अंदाज़ में प्रस्तुत करना था। उन्होंने कहा कि इस योजना पर दोबारा ध्यान देने और इसे व्यावहारिक रूप देने की आवश्यकता है।

उन्होंने मौस्सेसे इमाम ख़ुमैनी (रह.) की शैक्षिक और शोध संबंधी गतिविधियों का ज़िक्र करते हुए बताया कि संस्थान में इस्लामी विज्ञान, दर्शनशास्त्र और इस्लामी दृष्टिकोण से मानव विज्ञान के विभिन्न विषयों पर महत्वपूर्ण पुस्तकें तैयार की गई हैं। इनमें से कुछ पुस्तकों के अरबी और अंग्रेज़ी अनुवाद अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक और शोध जगत के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।

आयतुल्लाह रजब़ी ने आगे कहा कि क़ुरआन और अहले-बैत (अ.स.) की शिक्षाओं में ऐसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और बौद्धिक बिंदु मौजूद हैं, जिनसे आज की दुनिया भी लाभ उठा सकती है। इन शिक्षाओं से लाभ उठाकर शैक्षिक विकास को बढ़ावा देने, इस्लामी समाज की समस्याओं का समाधान खोजने और उम्मत-ए-मुस्लिमा की एकता को मज़बूत बनाने में मदद मिल सकती है।

अंत में उन्होंने शहीद आयतुल्लाह सैयद मुहम्मद बाक़िर सद्र (रह.) को एक विशिष्ट विचारक और सिद्धांतकार बताते हुए कहा कि मौस्सेसे इमाम ख़ुमैनी (रह.) सांस्कृतिक एवं इस्लामी संबंध संगठन के साथ सहयोग करने और इस्लामी शिक्षाओं को दुनिया भर में परिचित कराने के लिए तैयार है।

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