जर्मनी में छात्र आंदोलन की नई लहर की आहट; 31 अक्टूबर को देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान

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जर्मनी में छात्र आंदोलन की नई लहर की आहट; 31 अक्टूबर को देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान

जर्मनी के छात्र संगठनों और वामपंथी पार्टी ‘डी लिंके’ ने 31 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शनों का समर्थन किया है। इन प्रदर्शनों के माध्यम से शिक्षा के लिए बजट बढ़ाने, स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं में सुधार करने और पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराने की मांग की जाएगी। वहीं, राज्य के अधिकारी फ्रांस की तरह व्यापक जन आंदोलनों के फैलने की आशंका को लेकर चिंतित हैं।

 जर्मनी के छात्र संगठनों और वामपंथी पार्टी ‘डी लिंके’ ने 31 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शनों का समर्थन किया है। इन प्रदर्शनों के माध्यम से शिक्षा के लिए बजट बढ़ाने, स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं में सुधार करने और पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराने की मांग की जाएगी। वहीं, राज्य के अधिकारी फ्रांस की तरह व्यापक जन आंदोलनों के फैलने की आशंका को लेकर चिंतित हैं।

जर्मनी के एक छात्र संगठन और विपक्षी पार्टी ‘डी लिंके’ ने गुरुवार को अक्टूबर के अंतिम दिनों में आयोजित होने वाले प्रदर्शनों के समर्थन की घोषणा की। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इन प्रदर्शनों का उद्देश्य शिक्षा के लिए अधिक धन उपलब्ध कराने, शैक्षणिक क्षेत्र में निवेश बढ़ाने और स्कूलों की परिस्थितियों में सुधार की मांग करना है।

जर्मनी के संघीय छात्र सम्मेलन ने 31 अक्टूबर को देश के कई शहरों में होने वाले प्रदर्शनों का समर्थन किया है। संगठन की प्रवक्ता इसाबेल ज़ेल्टेनराइख ने समाचार पत्र ‘राइनिशे पोस्ट’ से बातचीत में इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि छात्रों को भी सड़कों पर उतरकर शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग करने का अधिकार है और इसके लिए उनके पास पर्याप्त कारण हैं।

‘GenZ regelt’ यानी ‘जेनरेशन ज़ेड अपने मामलों की जिम्मेदारी संभालती है’ और ‘GenZ steht auf’ यानी ‘जेनरेशन ज़ेड उठ खड़ी होती है’ नामक युवा एवं छात्र आंदोलन इन प्रदर्शनों के लिए समर्थकों को एकजुट करने के उद्देश्य से ऑनलाइन अभियान चला रहे हैं।

इन आंदोलनों की अन्य मांगों में जलवायु संरक्षण को मजबूत करना, जीवन-यापन की बढ़ती लागत से निपटने के उपाय करना और अनिवार्य सैन्य सेवा का विरोध करना शामिल है। आयोजकों ने स्पष्ट रूप से हिंसा के इस्तेमाल को खारिज किया है।

इसाबेल ज़ेल्टेनराइख ने कहा कि जर्मनी का संघीय छात्र सम्मेलन फ्रांस और इटली में प्रदर्शनों के दौरान उठाई गई कई मांगों से सहमत है। इनमें स्कूलों की सुविधाओं और बुनियादी ढांचे में सुधार, पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति, कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या कम करना, पढ़ाई के लिए बेहतर परिस्थितियां उपलब्ध कराना और ऐसी शिक्षा व्यवस्था बनाना शामिल है, जिसमें सामाजिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना सभी युवाओं को समान अवसर मिलें।

हालांकि, उन्होंने फ्रांस और इटली की स्थिति का उल्लेख करते हुए आगाह किया कि विभिन्न राजनीतिक समूह इन आंदोलनों को अपने प्रभाव में लेने की कोशिश कर सकते हैं।

विपक्षी पार्टी ‘डी लिंके’ की सह-अध्यक्ष इनेस शोर्टनर ने भी छात्र आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स एसोसिएशन (SDS) को संबोधित एक वीडियो संदेश में कहा कि जर्मनी को फ्रांस में हो रहे उन प्रयासों से सीखना चाहिए, जिनके तहत विभिन्न सामाजिक आंदोलनों के बीच संपर्क और सहयोग बढ़ाया जा रहा है।

शोर्टनर ने एसडीएस के कार्यकर्ताओं को समर्थन देते हुए कहा कि वह उनके पक्ष में खड़ी रहेंगी, चाहे उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई करे या मीडिया आलोचना करे। रिपोर्ट के अनुसार, यह संगठन फिलहाल बवेरिया और बाडेन-वुर्टेमबर्ग राज्यों में आंतरिक खुफिया एजेंसियों की निगरानी में है।

फ्रांस में सितंबर के अंतिम दिनों से छात्र बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं, शिक्षकों की संख्या बढ़ाने और पढ़ाई की परिस्थितियों में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके बाद इसी तरह के प्रदर्शन इटली में भी फैल गए। दोनों देशों में इन प्रदर्शनों के दौरान हिंसक घटनाएं भी सामने आई हैं।

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