हुज्जतुल इस्लाम मसूद मोहम्मदी ने इस्लामी गणराज्य ईरान के ख़िलाफ़ दुश्मनों की बढ़ती राजनीतिक, सैन्य और सांस्कृतिक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि दुश्मन एक साथ राजनीतिक और सैन्य क्षेत्रों में इस्लामी क्रांति को हाशिये पर धकेलने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, उनके अनुसार, अब तक ये प्रयास अपने निर्धारित उद्देश्यों को हासिल करने में सफल नहीं हुए हैं, बल्कि कुछ मामलों में इनके उलटे परिणाम सामने आए हैं।
,हुज्जतुल इस्लाम मसूद मोहम्मदी ने पिछले कुछ महीनों के दौरान इस्लामी क्रांति के विरोधियों की गतिविधियों में तेज़ी आई है। इनमें कुछ गतिविधियाँ प्रचार-प्रसार से जुड़ी हैं, जबकि अन्य की जड़ें इस्लामी ईरान के विरोधियों और दुश्मनी रखने वाले गुटों में हैं।
उन्होंने आगे कहा कि दुश्मन एक ही समय में राजनीतिक और सैन्य मोर्चों पर इस्लामी क्रांति को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक वे अपने लक्ष्यों को हासिल नहीं कर सके हैं। कुछ मामलों में उनके प्रयासों के परिणाम भी उनकी अपेक्षाओं के विपरीत रहे हैं।
इस हौज़ा शिक्षक ने इस्लामी गणराज्य ईरान के ख़िलाफ़ सांस्कृतिक और वैचारिक टकराव के विभिन्न पहलुओं की ओर संकेत करते हुए कहा कि आज सैन्य और मैदानी संघर्ष के साथ-साथ युवा पीढ़ी के ख़िलाफ़ वैचारिक और सांस्कृतिक युद्ध भी चलाया जा रहा है। इस युद्ध में मीडिया और विरोधी नेटवर्क जनमत को प्रभावित करने तथा युवाओं की धार्मिक और राष्ट्रीय मान्यताओं को कमज़ोर करने के उद्देश्य से सक्रिय हैं।
हुज्जतुल इस्लाम मोहम्मदी ने कहा कि इनमें से कुछ नेटवर्क इस्लामी गणराज्य के विरोधी समूहों के प्रचार संबंधी उद्देश्यों और योजनाओं के अनुरूप काम करते हैं। वे सोशल मीडिया और इंटरनेट की क्षमताओं का इस्तेमाल करके अपनी सांस्कृतिक योजनाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने समाज में एकता और राजनीतिक-सामाजिक जागरूकता को मज़बूत करने की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए कहा कि जब तक ईरानी जनता के बीच एकता, दूरदर्शिता और दुश्मन की रणनीतियों को पहचानने की भावना जीवित रहेगी, तब तक दुश्मनों को सैन्य और सांस्कृतिक क्षेत्रों में अपने उद्देश्यों को हासिल करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
अंत में, इस हौज़ा शिक्षक ने सांस्कृतिक और शैक्षिक संस्थानों की भूमिका को अधिक प्रभावी बनाने पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों को दुश्मनों की मनोवैज्ञानिक और वैचारिक रणनीतियों को स्पष्ट करने तथा आम जनता, विशेषकर युवा पीढ़ी में जागरूकता बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए, ताकि सोशल मीडिया पर सक्रिय विरोधी समूहों के उद्देश्यों और तरीकों को बेहतर ढंग से समझा जा सके।













