जम्मू-कश्मीर अंजुमन-ए-शरई शियान के महासचिव हुज्जतुल इस्लाम आगा सैयद मुजतबा अब्बास मूसवी सफवी ने इमामबाड़ा यागीपोरा मागाम में जुमे के खुतबे के दौरान महिलाओं और बच्चों के लापता होने की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नागरिकों की जान, सम्मान और सुरक्षा की रक्षा करना सरकार की बुनियादी जिम्मेदारी है। उन्होंने लापता लोगों की बरामदगी और ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए विशेष टास्क फोर्स के गठन, प्रभावी हेल्पलाइन शुरू करने और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया। इस अवसर पर उन्होंने हज़रत फातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की सीरत, अहलेबैत (अ) की विलायत तथा सामाजिक जीवन में तक़वा और नैतिक जिम्मेदारियों के महत्व को भी उजागर किया।
श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर अंजुमन-ए-शरई शियान के महासचिव हुज्जतुल इस्लाम आगा सैयद मुजतबा अब्बास मूसवी सफवी ने इमामबाड़ा यागीपोरा मागाम में नमाज़े जुमा के अवसर पर संबोधित करते हुए हज़रत फातिमा ज़हरा (स), अहलेबैत-ए-अतहार (अ) के मक़ाम व स्थान, मुहम्मद और आले मुहम्मद (अ) की विलायत तथा मानव जीवन में तक़वा और परहेज़गारी के बुनियादी महत्व पर प्रकाश डाला।
आगा सैयद मुजतबा अब्बास ने अपने संबोधन में कहा कि तक़वा केवल एक धार्मिक शब्द नहीं, बल्कि जीवन का ऐसा व्यापक नैतिक और व्यावहारिक सिद्धांत है, जो मनुष्य के चरित्र, व्यवहार और सामाजिक रवैये को सुधारने का माध्यम बनता है। उन्होंने कहा कि सच्ची धार्मिकता की मांग है कि मनुष्य अपने व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ सामूहिक जिम्मेदारियों को निभाते समय भी ईश्वर का भय, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों का ध्यान रखे।
उन्होंने सूरह कौसर की आयतों के संदर्भ में हज़रत फातिमा ज़हरा (स) की महानता और श्रेष्ठता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि हज़रत ज़हरा (स) का पवित्र अस्तित्व केवल एक महान ऐतिहासिक और आध्यात्मिक व्यक्तित्व का नाम नहीं, बल्कि सृष्टि में असाधारण मक़ाम और स्थान रखने वाली हस्ती हैं। उन्होंने अहलेबैत (अ) की रिवायतों की रोशनी में हज़रत फातिमा ज़हरा (स) के नूरानी मक़ाम, उनकी पवित्रता, धैर्य, दृढ़ता और महान आध्यात्मिक स्थान को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका पवित्र जीवन समस्त मानवता के लिए मार्गदर्शन, ज्ञान और ईश्वर की बंदगी का उज्ज्वल उदाहरण है।
आगा सैयद मुजतबा अब्बास ने आगे कहा कि मुहम्मद और आले मुहम्मद (अ) की विलायत केवल आस्था का संबंध नहीं, बल्कि ईश्वरीय मार्गदर्शन और सीधे रास्ते तक पहुंचने का बुनियादी माध्यम है। उन्होंने हज़रत आदम (अ) और अन्य पैगंबरों के संदर्भ में रिवायतें बयान करते हुए स्पष्ट किया कि अहलेबैत-ए-अतहार (अ) की विलायत और उनकी पहचान को इस्लामी शिक्षाओं में असाधारण महत्व प्राप्त है। उन्होंने कहा कि हज़रत फातिमा ज़हरा (स) के पवित्र व्यक्तित्व, उनकी सीरत और शिक्षाओं से जुड़ना वास्तव में धर्म की वास्तविक आत्मा से जुड़ना है।
उन्होंने हज़रत फातिमा ज़हरा (स) के शफाअत के मक़ाम और कयामत के दिन उनकी महानता और प्रतिष्ठा का उल्लेख करते हुए कहा कि पैग़म्बरे इस्लाम (स) ने कई अवसरों पर अपनी प्रिय पुत्री के मक़ाम और स्थान को स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि हज़रत ज़हरा (स) की पवित्र सीरत महिलाओं सहित पूरी मानवता के लिए पाकदामनी, हया, धैर्य, त्याग, सत्यवादिता और दृढ़ता का संपूर्ण आदर्श है, जिसे व्यावहारिक जीवन में अपनाने की आवश्यकता है।
अपने संबोधन के अंतिम भाग में आगा सैयद मुजतबा अब्बास ने समाज में महिलाओं और बच्चों के लापता होने की बढ़ती घटनाओं तथा इस संबंध में लोगों में व्याप्त चिंता की ओर गंभीरता से ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि यह एक अत्यंत संवेदनशील मानवीय और सामाजिक समस्या है, जिसे केवल आंकड़ों या औपचारिक प्रशासनिक कार्रवाइयों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि लापता लोगों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की बरामदगी तथा उनकी सुरक्षा के लिए प्रभावी, समन्वित और परिणामदायक कदम उठाना अनिवार्य है।
उन्होंने सरकार और संबंधित प्रशासनिक संस्थाओं से आग्रह किया कि इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए व्यापक और प्रभावी रणनीति तैयार की जाए। इसके तहत पुलिस, नागरिक प्रशासन, साइबर विशेषज्ञों तथा संबंधित राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय संस्थाओं पर आधारित एक विशेष टास्क फोर्स गठित की जाए, ताकि गुमशुदगी की घटनाओं की समय पर जांच, प्रभावित परिवारों की सहायता और लापता लोगों की बरामदगी के लिए समन्वित प्रयास किए जा सकें।
उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रभावी हेल्पलाइन व्यवस्था शुरू की जाए, संवेदनशील स्थानों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी निगरानी का दायरा बढ़ाया जाए तथा आधुनिक तकनीक और साइबर विशेषज्ञता का इस्तेमाल करके लापता लोगों की तलाश और अपराधों की रोकथाम सुनिश्चित की जाए।
आगा सैयद मुजतबा अब्बास ने स्पष्ट किया कि सरकार की जिम्मेदारी केवल राजस्व वसूलने और प्रशासनिक कार्यों को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों की जान, सम्मान, सुरक्षा और बुनियादी अधिकारों की रक्षा करना भी उसकी पहली जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जनता को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना किसी भी जिम्मेदार सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए और इस मामले में देरी या लापरवाही स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने सरकार और संबंधित अधिकारियों से अपील की कि समस्या की गंभीरता को समझते हुए तत्काल ठोस और व्यावहारिक कदम उठाए जाएं, ताकि प्रभावित परिवारों को राहत देने के साथ-साथ समाज में सुरक्षा और विश्वास का माहौल कायम किया जा सके।
संबोधन के अंत में आगा सैयद मुजतबा अब्बास ने उम्मते मुस्लिमा की उन्नति, समाज के सुधार, शांति और सुरक्षा तथा समस्त मानवता के मार्गदर्शन और कल्याण के लिए दुआ की।


















